जांजगीर चांपा

सोना अब उतना सोणा नहीं, सालभर में दस हजार टूटी कीमत, सराफा बाजार में सालभर में भारी मंदी

रायपुर

सराफा बाजार में सालभर में भारी मंदी का दौर आया है। जो सोनासाल भर पहले ठीक 9 अगस्त 2020 को 58420 रुपए था, उसमें 10710 रुपए की कमी आ गई है। यह एक साल बाद 9 अगस्त 2021 को 47710 रुपए हो गया है। एक दिन में इसमें 990 रुपए की कमी आई है। एक दिन पहले यह 48700 था। यही हाल चांदी का भी है। चांदी आज से ठीक सालभर पहले 81640 रुपए किलो थी, वह आज 66500 हो गई है। इसमें 15140 रुपए की गिरावट आई है। एक दिन में ही इसमें 2040 रुपए की कमी हुई है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण शादियों की सीजन समाप्त होना है। अब इसमें बड़ी तेजी का दौर धनतेरस से पहले आने की संभावना है। सराफा बाजार भी सालभर से कोरोना से प्रभावित रहा है। पिछले साल कोरोना के कहर के बाद जब सराफा बाजार खुला था, तो शादियों का सीजन होने के कारण सोने और चांदी में लगातार तेजी आई। पिछले साल तो शादियों के सीजन के बाद भी सोने और चांदी में रिकार्ड तेजी रही। अगस्त माह में ही सोने और चांदी की कीमत रिकार्ड स्तर पर रही, लेकिन पिछले साल के ठीक उलट इस साल अगस्त से ही कीमत में गिरावट होने लगी है।

अगस्त में आई थी तेजी सोने और चांदी में पिछले साल भी शादियों के सीजन में कीमत
50 हजार से कम थी, लेकिन पिछले साल शादियों का सीजन समाप्त होने के बाद अचानक इसमें तेजी आई थी। तब अगस्त में सोना प्रदेश में पहली बार 55 हजार से पार हो कर 58420 रुपए तक चला गया था। उस समय इसके पीछे का कारण वादा कारोबार में खरीदारी रही। बाजार में इसकी मांग कम होने के बाद भी भारी तेजी रही, लेकिन यह तेजी ज्यादा टिक नहीं सकी थी। इस बार जहां शादियों के सीजन में कीमत कम रही है, वहीं इसका सीजन समाप्त होने के बाद इसमें और गिरावट आ रही है।

इस माह इतनी गिरावट सराफा
कारोबारियों का कहना है, सोने और चांदी की कीमत में अभी तेजी के आसार नहीं हैं। अगस्त माह की बात करें तो सोने में 1680 रुपए की गिरावट आई है। पहली अगस्त को इसकी कीमत 49390 रुपए थी, जो अब 47710 हो गई है। इसी तरह से चांदी की कीमत 69770 थी, जो अब 66500 हो गई है। चांदी में 3270 रुपए की गिरावट आई है।

खरीदारी न होने से टूट रहा
भाव शादियों के सीजन के बाद अब सराफा बाजार में खरीदारी बहुत कम होने के कारण लगातार सोने और चांदी के भाव गिर रहे हैं। साल भर में सोने और चांदी की कीमत पिछले साल के मुकाबले बहुत कम हो गई है।
– लक्ष्मीनारायण लाहोटी, सराफा कारोबारी

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