बिलासपुर

सूचना के बाद भी दुष्कर्म पीड़ित की ओर से नहीं आया जवाब, नाबालिग आरोपित को मिली जमानत

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हाई कोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद भी दुष्कर्म पीड़ित बच्ची की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ। यहां तक पुलिस भी आरोपित के खिलाफ साक्ष्य प्रस्तुत करने में विफल रहा। इसके चलते हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपित किशोर की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। उसे 20 हजार स्र्पये की जमानत राशि व साथ में उसी के बराबर बांड भरने पर उसे जमानत देने का आदेश दिया है। मामला कबीरधाम जिले का है। यहां कवर्धा थाना क्षेत्र की नाबालिग बच्ची का रास्ता रोककर उसे बंधक बना लिया गया। फिर डरा-धमकराकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस मामले में धारा 341, 342, 323, 506, 376 व पास्को एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर पुलिस ने किशोर आरोपित को गिरफ्तार किया। उसे किशोर न्यायालय में पेश कर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। इस बीच आरोपित किशोर की तरफ से प्रथम श्रेणी विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट (पाक्सो) के समक्ष जमातन अर्जी प्रस्तुत की गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद आरोपित किशोर की तरफ से हाई कोर्ट में जमानत याचिका पेश की गई। इस दौरान बताया गया कि आरोपित किशोर बाल संप्रेक्षण गृह में परिरूद्ध है। इस प्रकरण में किशोर न्याय बोर्ड ने त्रुटिपूर्ण आदेश जारी किया है। इस प्रकरण की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पीड़ित पक्ष को नोटिस जारी कर आरोपित की जमानत को लेकर जवाब मांगा था। लेकिन, प्रकरण में दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के परिवारवालों को सूचना दी गई। फिर भी उनकी ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस प्रकरण में पुलिस ने भी आरोपित किशोर के विस्र्द्ध साक्ष्य सिद्ध नहीं किया। मालूम हो कि दुष्कर्म के मामले में जमानत देने को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त नियम बनाया है। इसके तहत दुष्कर्म पीड़ित से उसे जमानत देने या नहीं देने को लेकर सहमति लेने का प्रविधान तय किया गया है। इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए जस्टिस एनके चंद्रवंशी ने आरोपित किशोर को 20 हजार स्र्पये की जमानत राशि व उसी के बराबर अनुबंध पत्र अधिनस्थ न्यायालय में जमा करने की शर्त पर जमानत दे दिया है।

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