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चीनी निर्यात पर केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जानिए मिल मालिकों और किसानों पर क्या होगा असर

नई दिल्ली

भारत से एक्सपोर्ट होने वाली चीनी पर अब सब्सिडी नहीं दी जाएगी. केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात पर दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है. पहले से ही चर्चा चल रही थी कि भारत इसे खत्म कर सकता है. चीनी की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है.

यह फैसला 2021-22 में निर्यात होने वाले चीनी पर लागू होगा. केंद्र सरकार ने कहा है कि चीनी मिलों को इस साल 60 से 70 लाख चीनी निर्यात का लक्ष्य रखना चाहिए. साथ ही साथ निर्यात के लिए मिलों को नए देशों में संभावनाएं तलाशने की जरूरत है. भारत से इस साल 77 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ है. निर्यात का एक हिस्सा बिना सब्सिडी वाले चीनी का है.

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है. सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन ब्राजील में होता है. लेकिन इस साल ब्राजील में उत्पादन में संभावित गिरावट की संभआवना है. ऐसे में भारत के पास निर्यात के लिए बेहतर अवसर है. इसका लाभ चीनी मिलों को मिलेगा. चीनी निर्यात से आए पैसे को चीनी मिलें किसानों के बकाया भुगतान में इस्तेमाल कर सकती हैं. उम्मीद है कि इससे किसानों का भुगतान समय पर होगा.

मई में हुई थी चीनी एक्सपोर्ट सब्सिडी में कटौती
अप्रैल 2022 तक ब्राजील की चीनी बाजार में आ सकती है. ऐसे में भारतीय चीनी मिलों के पास जनवरी 2022 से लेकर अप्रैल 2022 तक निर्यात करने के शानदार मौके हैं. बढ़ती कीमतों के कारण भी भारत के चीनी की मांग वैश्विक बाजार में ज्यादा है. ऐसे में एक्सपोर्ट सब्सिडी खत्म करने के कारण भारत के निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

इससे पहले मई के महीने में केंद्र सरकार ने चीनी निर्यात पर सब्सिडी में 2000 रुपए प्रति टन की कटौती की थी. वैश्विक बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने 6000 रुपए प्रति टन निर्यात सब्सिडी को कम कर के 4000 रुपए कर दिया था. उसी वक्त खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा था कि कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो सब्सिडी में और कटौती की जाएगी.

भारत ने इस साल किया रिकॉर्ड चीनी निर्यात
इस साल भारतीय चीनी मिलों ने रिकॉर्ड 72.3 लाख टन का निर्यात किया है. 30 सितंबर को समाप्त मार्केटिंग ईयर 2020-21 में अनुमानित रूप से रिकॉर्ड 72.3 लाख टन चीनी का निर्यात किया है. इसमें सबसे ज्यादा निर्यात इंडोनेशिया को किया गया. इंडोनेशिया को अधिकतम निर्यात 18.2 लाख टन, उसके बाद अफगानिस्तान (6,69,525 टन), यूएई (5,24,064 टन) और सोमालिया (4,11,944 टन) को निर्यात किया गया.

नए मार्केटिंग ईयर 2021-22 में अब तक लगभग 15 लाख टन के निर्यात सौदे हुए हैं. कई चीनी मिलों ने आगामी सत्र में निर्यात के लिए वायदा अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं. इसलिए यह माना जाता है और अपेक्षित है कि भारतीय चीनी मिलें इस अवसर का लाभ उठाएंगी और अगले सत्र में भी 60 लाख टन तक चीनी का निर्यात करने की स्थिति में होंगी.

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