छत्तीसगढ़

रायपुर में लिफ्ट में फंसीं IAS की पत्नी, बैकअप सिस्टम फेल; दो हाई-प्रोफाइल घटनाओं से सुरक्षा नियमों पर सवाल

रायपुर: रायपुर की बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट सुरक्षा अब गंभीर मुद्दा बनती जा रही है। हाल ही में सामने आई दो हाई-प्रोफाइल घटनाओं ने न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर किया है, बल्कि लोगों के बीच डर और नाराजगी भी बढ़ा दी है। प्रशासन ने इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।

पिथालिया कॉम्प्लेक्स में 10-12 मिनट फंसीं गार्गी परदेशी

पिथालिया कॉम्प्लेक्स में IAS अधिकारी सिद्धार्थ कोमल परदेशी की पत्नी गार्गी परदेशी करीब 10 से 12 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं। इससे पहले करेंसी टॉवर में अपर मुख्य सचिव स्तर की अधिकारी भी लिफ्ट में फंस चुकी हैं। इन घटनाओं ने लिफ्ट मेंटेनेंस और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।

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करेंसी टावर घटना ने बढ़ाई चिंता

21 अप्रैल को करेंसी टॉवर में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ऋचा शर्मा करीब 20 मिनट तक लिफ्ट में फंसी थीं। दोनों मामलों में बिजली बाधित होने के बाद बैकअप सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर पाया। इससे यह स्पष्ट होता है कि कई इमारतों में सुरक्षा उपकरणों का नियमित परीक्षण नहीं हो रहा।

क्या कहते हैं नियम

राज्य में संचालित सभी लिफ्टों का मुख्य विद्युत निरीक्षकालय में पंजीयन अनिवार्य है। साथ ही समय-समय पर तकनीकी परीक्षण, सुरक्षा ऑडिट और मेंटेनेंस जरूरी है। बिजली जाने की स्थिति में ऑटोमैटिक रेस्क्यू डिवाइस, जनरेटर बैकअप और अलार्म सिस्टम का सक्रिय होना अनिवार्य है।

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इसके अलावा भवन प्रबंधन और लिफ्ट ऑपरेटर को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना, नोटिस और बिजली आपूर्ति रोकने जैसी कार्रवाई का प्रावधान है।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

घटनाओं के बाद नगर निगम और मुख्य विद्युत निरीक्षकालय ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित प्रबंधन और एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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लोगों की मांग: सुरक्षा में कोई समझौता नहीं

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद लोगों ने नियमित लिफ्ट ऑडिट की मांग उठाई है। उनका कहना है कि हर कॉम्प्लेक्स में मेंटेनेंस रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और बैकअप सिस्टम, इमरजेंसी अलार्म व इंटरकॉम की मासिक जांच अनिवार्य हो। साथ ही लापरवाही करने वाले बिल्डर और एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, क्योंकि सुरक्षा में छोटी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।

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