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जांजगीर-चांपा: दोस्तों की AI कौतूहल…होनहार विद्यार्थी की मौत! दो महीने से तंग कर रहे थे स्कूल के सहपाठी

पंतोरा हाईस्कूल में कक्षा 11 वीं गणित विषय में था अध्यनरत

जांजगीर-चांपा
बलौदा शिक्षा विकासखंड अंतर्गत आने स्कूल पंतोरा हाई स्कूल के होनहार विद्यार्थी ने अपने ही साथियों की ब्लैकमेलिंग और मानसिक प्रताडऩा से तंग आकर आत्महत्या कर ली है।
जानकारी के अनुसार स्कूल के दस होनहार विद्यार्थी में शामिल लोकेश यादव पिता बंशीलाल यादव बुढ़ेना का रहने वाला था और पंतोरा हाईस्कूल में कक्षा 11 वीं गणित विषय में अध्यनरत था । पिछले दो महीने से लोकेश को स्कूल में परेशान किया जा रहा था जिसकी शिकायत उसने अपने शिक्षिका से की थी। शिक्षकों ने परेशान करने वाले छात्रों को समझाया और मामला शांत कराया। अचानक कुछ दिन पहले लोकेश परेशान दिखाई दे रहा था। घर में पिता के पूछने पर बताया कि कुछ लड़के उसे परेशान कर रहे हैं। उसका किसी लड़की के साथ फोटो एडिट कर बदनाम करने की धमकी दे रहे हैं। उसके पिता बंशीलाल यादव ने बताया कि कुछ दिनों से वह परेशान था और खाना नहीं खा रहा था। 13 नवम्बर दिन गुरुवार को वह स्कूल नहीं गया था और हम सब अपने काम में बाहर थे और उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है।

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एक दिन पहले बहुत रोया था स्कूल में लोकेश
बताया जा रहा है कि लोकेश यादव के एक शिक्षक हाऊसी डाल्टन स्कूल में उसे बहुत रोते हुए देखा था। दूसरे दिन जब लोकेश यादव स्कूल नहीं आया तो वह घर गए थे कि लोकेश की तबीयत खराब तो नहीं है जिस समय वे घर पहुंचे लोकेश यादव फांसी लगा चुका था और उसे फांसी से उतारा जा रहा था। मामला पंतोरा पुलिस तक पहुंचा और लोकेश के मृत शरीर का पोस्टमार्टम कराया गया जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं आयी है। लोकेश के कुछ दोस्तों ने बताया कि उसने अपनी परेशानी डाल्टन सर और शिक्षिका अर्चना तिवारी से बतायी थी और उसे परेशान किए जाने की बात भी प्रधान पाठक और अधिकतर विद्यार्थी गणों को पता थी परंतु इस मामले में शिक्षक और प्रधान पाठक की लापरवाही ने एक होनहार छात्र को आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया।

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एआई का इस्तेमाल, दोषी कौन
आज आधुनिक युग में तकनीकी ज्ञान बहुत आवश्यक है और युवा वर्ग इसे बख़ूबी सीख भी रहा है लेकिन साथ ही इस ज्ञान का उपयोग कैसे करना है यह माता-पिता और शिक्षक ही बता सकते हैं। प्रश्न उठता है कि जब लोकेश के द्वारा बताया गया कि उसके फोटो विडियो एआई द्वारा किसी लड़की के साथ बनाएं गये है, इस बात को शिक्षकों को गंभीरता से लेकर और साथ लोकेश और उसके साथ बदमाशी करने वाले छात्रों को विश्वास में लेकर मामले को सुलझाना था लेकिन ये शिक्षक पढ़ाने में तो निपुण हो गये है परंतु विद्यार्थियों के मन को पढऩे में आज भी असमर्थ हैं क्योंकि विद्यार्थियों की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के रुप में ही नहीं बल्कि खुद माता-पिता होने के नाते दोहरी है इसलिए भी कि आज जिन स्कूलों में वे पढ़ा रहे हैं उन विद्यार्थियों के अभिभावको को अवसाद तनाव और मनोचिकित्सा की जानकारी नहीं है लेकिन आज भी हमारा शिक्षा तंत्र पढ़ाने के अलावा सब कर रहा है।

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मुझे इस मामले में जानकारी मिली है एक होनहार छात्र की मौत निश्चित ही दुखद है। अगर शिक्षकों को उसकी जानकारी थी तो उन्हें इस तरह की गलत हरकत पर अंकुश लगाना था।
जी गौतम
विकास खंड शिक्षा अधिकारी बलौदा

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