छत्तीसगढ़

मिड डे मील बनाने वालों के बुझे चूल्हे,  2 की हुई मौत, सरकार ने 500 रुपए बढ़ाने का दिया भरोसा, संघ ने कहा, ”मरेंगे हटेंगे नहीं”

रायपुर: छत्तीसगढ़ रसोईया संघ पिछले 35 दिनों से तूता धरना स्थल, नया रायपुर में अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठा है. जिन लोगों के जिम्मे स्कूल जाने वाले बच्चों की भूख मिटाने की जिम्मेदारी थी, उनके ही चूल्हे सरकार की अनदेखी के कारण बुझ रहे हैं. हालात ये हैं कि धरने पर बैठे रसोईया संघ के 2 लोगों की मौत हो चुकी है.

सरकार ने भरोसा दिया है कि मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन संघ के लोगों का कहना है कि हमें कलेक्टर वेतनमान चाहिए. जब तक यह नहीं मिलेगा हम लोग धरना खत्म नहीं करेंगे.

मध्यान भोजन बनाने वालों के बुझे चूल्हे

रसोइया संघ के लोगों से ईटीवी भारत ने बातचीत की. संघ के लोगों ने बताया कि जो मानदेय हमें दिया जा रहा है उससे घर की रसोई नहीं चल पा रही है. बच्चों की पढ़ाई तो संभव ही नहीं है. एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है, कि इस धरने का अंत क्या होगा. धरने और अपनी मांगों को लेकर रसोईया संघ के पदाधिकारी ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से मुलाकात की थी.

See also  चूहा खा गए 7 करोड़ का धान, अब घोटाले में प्रशासन का बड़ा एक्शन, DMO निलंबित

मंत्री गजेंद्र यादव का कहना था कि जो मानदेय मिल रहा है उसमें ₹500 की बढ़ोतरी कर दी जाएगी. लेकिन शिक्षक संघ इसे मानने को तैयार नहीं है. उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ के श्रम कानून में खुद छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस मानदेय का जिक्र किया है, उस पैसे को ही देने के लिए सरकार तैयार नहीं है.

कलेक्टर दर पर मानदेय बढ़ाने की कर रहे मांग

रसोइया संघ की मांगों और उनकी परेशानियों को लेकर, ईटीवी भारत ने धरना स्थल का पड़ताल किया. वहां पर पूरा धरना स्थल टेंट सिटी में बदल गया है. सारे रसोईया संघ के लोग परिवार और बच्चों के साथ यहां अस्थाई तौर पर अपना घर बनाकर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका कहना है जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती, हम यहां से नहीं जाएंगे. लेकिन इस बीच एक सवाल और है कि पूरे राज्य के मध्यान भोजन बनाने वाले रसोइया जब धरना स्थल पर बैठे हुए हैं, तो फिर विद्यालयों में मध्याह्न भोजन कैसे बन रहा है. इसे लेकर ईटीवी भारत ने जब धरने पर बैठे रसोइया संघ के पदाधिकारी से बात की. उनका कहना था कि सरकार को इस बात की चिंता ही नहीं है कि पूरे राज्य में शैक्षणिक सत्र कैसे चलेगा. बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी. बच्चे आ रहे हैं लेकिन भूखे रह रहे हैं. इस बात की चिंता करना अब सरकार नहीं कर रही है.

See also  धान खरीदी में किसानों को बड़ी राहत: मुख्यमंत्री के निर्देश पर, किसानों को मिला अतिरिक्त दो दिन का समय, 05 और 06 फरवरी को होगी धान खरीदी

35 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी

यह पूछे जाने पर की सरकार अगर बात नहीं मानती है तो आपका अगला निर्णय क्या होगा, उनका साफ तौर पर कहना है कि जब तक सरकार हमें कलेक्ट्रेट मानदेय नहीं देती है, हम धरना स्थल से नहीं जाएंगे. रसोइया संघ के लोगों ने कहा कि धरना को शुरू हुए 35 दिन हो गया और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इसमें हमारे 2 लोगों की जान चली गई. उन लोगों की मांग थी कि उनका जीवन चले इसके लिए सरकार उनकी मांग को मान ले. लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी और दो लोगों की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि चाहे जो स्थिति बने, जब तक सरकार हमारी बात नहीं मानेगी, हम लोग धरना स्थल से नहीं जाएंगे.

स्कूलों में मिड डे मील पर पड़ा असर

ईटीवी भारत से बात करते हुए वहां के मध्यान भोजन से जुड़ी महिलाओं ने कहा, व्यवस्था के नाम पर यहां कुछ नहीं है. न पीने के पानी की व्यवस्था है न शौचालय की व्यवस्था है. मच्छर और मक्खियों बहुत ज्यादा हैं. जिससे अब जीवन को खतरा महसूस हो रहा है. लेकिन सरकार को इस बात की कोई चिंता नहीं है. हमारे पास कोई विकल्प नहीं है, इसलिए हम अपने छोटे बच्चों को लेकर यहां बैठे हैं.

See also  मार्च में प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव : रायपुर में जुटेंगे विभिन्न देशों में बसे छत्तीसगढ़ के रहवासी, NACHA के सहयोग से होगा आयोजन

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे लोगो ने कहा कि बच्चे इतने छोटे हैं कि घर नहीं रह सकते, लेकिन अब पेट की मजबूरी ऐसी है कि हमें करना पड़ रहा है. हम लोग सरकार से बार-बार यही निवेदन कर रहे हैं कि हमारी मांगों को मान लिया जाए, ताकि हमारे घर के चूल्हे जल सकें. छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था ठीक हो सके. जो भी बच्चे विद्यालय आ रहे हैं समय पर उन्हें मध्यान भोजन के तहत मिलने वाली सुविधा दी जाए. अब यह सरकार के ऊपर है कि वह कितना जल्दी इस पर निर्णय लेती है. हम सभी लोगों के लिए बेहतर जीवन जीने की सुविधा देते हैं.

Related Articles

Leave a Reply