छत्तीसगढ़

आरक्षक भर्ती चयन सूची पर बवाल, कम नंबर वालों का चयन, अधिक वालों को बाहर ? युवाओं का फूटा गुस्सा

बिलासपुर। जिले में आज वह तस्वीर सामने आई जिसने प्रदेश के हजारों युवाओं के दिलों में आग भर दी है। युवाओं ने अपनी जवानी, अपनी मेहनत, अपना सब कुछ दांव पर लगाकर आरक्षक भर्ती की तैयारी की… लेकिन जब चयन सूची आई, तो उसमें ऐसी अनियमितताएँ दिखाई दीं कि उनका गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। बिलासपुर के चकरभाठा स्थित नयापारा मैदान में आज सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी जमा हुए और चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

युवाओं का आरोप है कि आरक्षक भर्ती की चयन सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। उनका कहना है कि जिन अभ्यर्थियों के नंबर कम हैं, उनका चयन कर दिया गया… और जिनके नंबर ज्यादा हैं, उन्हें बाहर कर दिया गया। यह बात युवाओं को अंदर तक हिला गई है। चयन सूची पर इतने बड़े पैमाने पर सवाल उठने के बाद अब मामला तूल पकड़ चुका है और अभ्यर्थियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। अभ्यर्थी लगभग 6 हजार पदों की पूरी चयन सूची पर स्टे लगाने की मांग करने जा रहे हैं।घटना स्थल पर मौजूद युवाओं ने मीडिया से कहा उन्होनें दिन-रात मेहनत की, अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी। लेकिन अगर चयन में भेदभाव होगा, नंबर के आधार पर न्याय नहीं मिलेगा, तो यह उनके साथ बड़ा अन्याय है।” युवाओं ने साफ कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।

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इस प्रदर्शन में राजनीति की एंट्री भी हो गई। कांग्रेस के कई स्थानीय नेता अभ्यर्थियों के बीच पहुँचे और आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने प्रदेश के युवाओं के साथ धोखा किया है। उनका दावा है कि चयन सूची में गड़बड़ी साफ दिखाई देती है और सरकार को तुरंत जांच कराना चाहिए।इधर, प्रशासन ने प्रदर्शन पर कड़ी नजर रखी। भारी संख्या में पुलिस बल औरअधिकारियों की टीम मौके पर मौजूद रही। तहसीलदार बोदरी, संदीप कुमार साय ने कहा कि अभ्यर्थी बिना किसी अनुमति के इतनी बड़ी संख्या में एकत्र हुए हैं, इसलिए उन्हें हटाने की प्रक्रिया की जा रही है।

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युवाओं की मांग साफ है। या तो चयन सूची में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की जाए, या फिर हाईकोर्ट से सूची पर स्टे लगवाया जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन युवाओं को न्याय मिलेगा, या फिर पिछली भर्तियों की तरह इन्हें भी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी? प्रदेश के हजारों युवाओं की उम्मीदें अब प्रशासन और अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं।

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