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परीक्षा परिणाम जानकर आप रह जाएंगे हैरान, 100 नंबर में दिए 367, 196, 151…

नई दिल्ली

गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन में स्थित विश्व-भारती विश्वविद्यालय में प्रशासन के समक्ष अजब स्थिति पैदा हो गई है. एम.एड में प्रवेश की मेरिट सूची (M.Ed Merit List) के प्रकाशन में देखा गया है कि विद्यार्थियों को 100 अंक में से किसी को 367 तो किसी को 196 और 151..या उसके अधिक अंक मिले हैं. सूत्रों के मुताबिक एम.एड में प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट सोमवार शाम को विश्वभारती की वेबसाइट पर जारी किया गया था. परिणाम को देखकर छात्रों की आंखें भौंचकी रह गईं. किसी को 100 में से 100, किसी को 198, किसी को 151 मिले हैं. अधिकारियों की इस घोर लापरवाही को देखकर हर कोई हैरान है. छात्रों ने सवाल किया कि इस तरह आकलन कैसे किया गया? हालांकि इस संबंध में अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है.

एम.एड प्रवेश के लिए इस वर्ष की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा 14 सितंबर को बिनय भवन में आयोजित की गई थी. विश्वभारती के आंतरिक और अन्य विश्वविद्यालयों के छात्रों ने 50 सीटों के लिए परीक्षा दी थी. इनमें से 25 सीटें अंदरूनी और 25 बाहरी लोगों के लिए आरक्षित हैं. 100 अंकों में से 60 अंक लिखित और 40 अंक अकादमिक स्कोर के माध्यम से निर्धारित किए जाते हैं. परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को मेरिट सूची के आधार पर भर्ती होने का अवसर मिलता है, लेकिन यह देखा गया है कि भाषा समूह के 100 छात्रों में से उन्हें 100 में से क्रमशः 200 फीसदीअधिक अंक मिले. किसी को 198 तो किसी को 375 प्राप्त हुए तथा समाजशास्त्र विभाग में विद्यार्थियों को क्रमश: 196, 367, 151,275 मिले हैं. सवाल यह है कि परीक्षार्थियों को 100 में से 200 या 150 कैसे मिले?

इसके अलावा, छात्रों ने शिकायत की कि आंतरिक सीटों पर कुछ बाहरी छात्रों के नाम भी मेरिट सूची में शामिल हैं. नतीजतन, परीक्षार्थी असमंजस में पड़ गए हैं. छात्रों का कहना है कि विश्व-भारती प्रशासन ने इतना गैर जिम्मेदाराना काम कैसे किया? कई छात्र पहले से ही इस विवादित सूची को जल्द से जल्द बदलने की मांग कर रहे हैं. इससे पहले 26 अगस्त को छात्रों के एक वर्ग ने तीन छात्रों की बर्खास्तगी के विरोध में विश्वभारती स्थित कुलपति आवास के सामने आंदोलन शुरू कर दिया था. उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने फाल्गुनी पान, सोमनाथ साव और रूपा चक्रवर्ती को तीन साल के लिए बर्खास्त कर दिया था. इसके अलावा, विश्व भारती ने भौतिकी के दो प्रोफेसरों पीयूष कांति घोष और अरोनी चक्रवर्ती को अनुशासन भंग के आरोप में निलंबित कर दिया था. मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस राजशेखर मंथा ने कहा था कि आंदोलन खत्म किया जाए. मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया था.हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही थी, लेकिन फिर विवाद पैदा हो गया है.

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