छत्तीसगढ़

डेढ़ करोड़ की LPG गैस चोरी का बड़ा खुलासा, फरार संतोष-सार्थक ठाकुर महाराष्ट्र से गिरफ्तार, होंगे और कई बड़े खुलासे

महासमुंद। जिले में करोड़ों के एलपीजी गैस गबन मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। करीब दो महीने से फरार चल रहे ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक और उसके बेटे को पुलिस ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन इस पूरे घोटाले की सबसे चौंकाने वाली कड़ी है… जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव का नाम… जिसे पुलिस इस पूरे खेल का मास्टर माइंड और पर्दे के पीछे का मुख्य षड्यंत्रकारी मान रही है।

महासमुंद पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले का खुलासा किया। कैसे सरकारी सिस्टम का इस्तेमाल कर गैस की हेराफेरी की गई… कैसे फर्जी दस्तावेज तैयार हुए… और कैसे करोड़ों की गैस बाजार में खपाई गई…

सिंघोड़ा थाना में दर्ज एलपीजी गैस गबन मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और उसके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को गिरफ्तार किया है।

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पुलिस के मुताबिक, दोनों पिता-पुत्र करोड़ों रुपए की एलपीजी गैस हेराफेरी मामले में लंबे समय से फरार थे और लगातार शहर बदलकर पुलिस को चकमा दे रहे थे। लेकिन जांच में जो सबसे बड़ा नाम सामने आया… वो था जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव का।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि खाद्य अधिकारी अजय यादव ही पूरे नेटवर्क का अहम चेहरा था। आरोप है कि एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रकों को सुपुर्दनामा दिलाने से लेकर फर्जी तौल पंचनामा तैयार करवाने तक… हर स्तर पर उसकी भूमिका सामने आई है। पुलिस के अनुसार, खाद्य विभाग कार्यालय में ही फर्जी पंचनामों पर हस्ताक्षर कराए गए।

इतना ही नहीं… गैस का स्टॉक जल्दी खाली करवाने और तौल नहीं कराने की साजिश में भी मिलीभगत सामने आई है। एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान में अजय यादव की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई।

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उधर मुख्य आरोपी संतोष ठाकुर और उसका बेटा सार्थक सिंह ठाकुर गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार रायपुर, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर में ठिकाने बदल रहे थे। पुलिस ने 11 शहरों में टावर डंप, सीडीआर एनालिसिस, टोल डेटा और सोशल मीडिया ट्रैकिंग के जरिए दोनों आरोपियों का पीछा किया।

आखिरकार कोल्हापुर के एक होटल में दोनों के छिपे होने की सूचना मिली… जिसके बाद महासमुंद पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस की मदद से दबिश देकर पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर लिया।

जांच में सामने आया कि करीब 87 टन एलपीजी गैस की हेराफेरी की गई। आरोप है कि आपदा का फायदा उठाकर गैस को बिना जीएसटी के अलग-अलग एजेंसियों और संस्थानों को बेचा गया। पुलिस के मुताबिक, अप्रैल महीने में 40 टन गैस की खरीद दिखाई गई… लेकिन बिक्री 135 टन तक की गई।

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पुलिस अधीक्षक महासमुंद बताया कि

इस मामले में पहले ही अजय यादव समेत पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब मुख्य आरोपी पिता-पुत्र की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को और बड़े खुलासों की उम्मीद है।

महासमुंद के इस करोड़ों के एलपीजी गबन मामले ने अब सरकारी सिस्टम और निजी नेटवर्क की मिलीभगत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है… और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और नाम सामने आ सकते हैं।

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