छत्तीसगढ़

बच्ची से गैंग रेप पर ऐतिहासिक फैसला : मौत आते तक जेल में ही रहेगा दुष्कर्मी नाबालिग बच्ची से गैंग रेप

पेंड्रा। पेंड्रा के विशेष अपर सत्र न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। नाबालिग बच्ची से गैंग रेप के मामले में बालिग आरोपी को प्राकृतिक रूप से आने वाली मौत तक आजीवन कारावास भुगतना होगा। यानी कि अब रेप के आरोपी की जेल में ही मौत होगी। गैंगरेप का ये मामला 3 मार्च 2020 का है। मिली जानकारी के मुताबिक मरवाही के जल्दा गांव में अपने नाना के घर आई थी बच्ची। तभी हेमंत सिंह ने एक नाबालिग आरोपी के साथ मिलकर गैंगरेप किया था। अब लगभग डेढ़ साल बाद विशेष अपर सत्र न्यायाधीश विनय कुमार प्रधान ने ये कड़ा फैसला सुनाया है।

दरअसल 03 मार्च 2020 को मरवाही थाना क्षेत्र के जल्दा गांव में पीड़िता नाबालिग बच्ची जो कि कक्षा दसवीं की छात्रा थी अपने नाना के घर शादी कार्यक्रम में आई थी और शाम करीब 6 बजे वह अपनी सहेली के साथ घर के बाहर खेल रही थी। तभी उसे आरोपी हेमंत सिंह और एक अन्य नाबालिग उठाकर जंगल की तरफ ले गये और बारी-बारी से उसके साथ बलात्संग किया। पीड़िता के साथ खेलने वाली सहेली ने आकर बतलाया तब पीड़िता की मां और घर के लोग उसे जाकर ढूंढे तो पीड़िता खेत में पड़ी मिली। जिसके बाद घटना की जानकारी मरवाही पुलिस को दी गयी। मरवाही पुलिस ने पीड़िता की शिकायत के आधार पर अभियुक्त हेमंत सिंह तथा अपचारी बालक के खिलाफ भादवि की धारा 341, 366 ए, 376 डी और पास्को एक्ट की धाारा 4 के तहत अपराध क्रमांक 32/2020 दर्ज किया और दूसरे दिन ही गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में विषेश अपर सत्र न्यायाधीष श्री विनय कुमार प्रधान ने आरोपी हेमंत सिंह को भादवि की धारा 363 के तहत 3 साल के सश्रम कारावास और 2000 रुपये का अर्थदंड, धारा 366 के तहत 10 साल के सश्रम कारावास और 2000 रुपये का अर्थदंड और अभियुक्त को धारा 376 (घ, क) में अलग से दंडादेष न करते हुये लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पास्को एक्ट) 2012 की धारा 5छ/6 के तहत प्राकृतिक मृत्यु तक आजीवन कारावास एसं बीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। कारावास से दंडनीय सभी सजाएं एक साथ भुगताई जाएंगी। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक पंकज नगाईच ने किया। साथ ही पीड़िता को इस वारदात में हुई मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा को देखते हुये उसके पुनर्वास के लिये पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत उसे समुचित प्रतिकर दिये जाने के लिये निर्णय की एक कॉपी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के सचिव को भेजने का निर्देश दिया है।

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