देश

पत्नी ने 36 साल में दर्ज कराए 21 केस, बेटे-बहू ने भी किया प्रताड़ित; अब कोर्ट का आदेश- बेटा, बहू, पत्नी दो महीने में खाली करें घर

भोपाल

एक बुजुर्ग दंपति की लड़ाई का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दरअसल बुजुर्ग व्यक्ति के बेटा और बहू उन्हे घर से निकलने के लिए रोज प्रताड़ित करते थे. इस बात से परेशान होकर बुजुर्ग ने एसडीएम कोर्ट में इस की शिकायत कर दी. इस मामले की सुनवाई चल ही रही थी कि बेटा बहू ने बहला फुसलाकर मां को अपनी तरफ कर लिया और मां को अपने पास बुला लिया. इसके बाद मां ने अपने बेटे की बातों में आकर पति के खिलाफ बागसेवनिया थाने में प्रताड़ना, घरेलू हिंसा के तहत केस दर्ज करा दिया. 36 साल बाद पत्नी के अचानक वापस लौट आने पर बुजुर्ग ने पत्नी के घर छोड़कर जाने, बच्चों के पालन-पोषण, बेटे-बहू और पत्नी के द्वारा प्रताड़ित करने के सबूत पेश किए. मामला समझ में आने के बाद एसडीएम कोलार ने तीनों को 2 महीने के अंदर मकान खाली करके जाने के आदेश दे दिए हैं. आवेदक प्रेम नारायण साहू ने बताया कि वो बीएचईएल में सुपरवाइजर थे. उनकी शादी 1960 में हुई थी. उनके 4 बच्चे हैं. 3 लड़का और एक लड़की. पत्नी के पिता की उस समय गांजे-भांग की दुकान थी, जो बाद में बंद हो गई. उसके बाद ससुर ने लड़कियों के घर में हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया. मेरी पत्नी के 5 बहन और 4 भाई थे. पत्नी अपने मायके के हस्तक्षेप के बाद बच्चों को छोड़कर मायके चली गई. उस समय बड़े बेटे की उम्र 15 और सबसे छोटे बेटे की उम्र 7 साल थी. पत्नी ने शादी के 25 साल यानी 1985 में उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का प्रकरण दर्ज कराया. यहीं नहीं पत्नी की 3 बहनों ने भी अपने पतियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया.

दहेज प्रताड़ना के केस में कोर्ट ने दोबारा पति के पास नहीं जाने की शर्त पर 170 रुपए भरण-पोषण की राशि देने के आदेश दिए. 1995 में भी उन्होंने भरण-पोषण की राशि बढ़ाने के रिवीजन याचिका दायर की. उसमें भी कोर्ट ने राशि बढ़ा दी. आवेदक ने बताया कि बेटा राकेश और बहू लता ने भी उन पर मकान खाली करने और संपत्ति नाम करने के लिए दबाव बनाया. इसके कारण वो एसडीएम कोर्ट पहुंचे. तीनों को कोर्ट ने उपस्थित होने का नोटिस दिया. उसी दिन बेटा-बहू मां को घर वापस ले आए.

प्रेम नारायण ने एसडीएम कोर्ट को बताया कि उनकी उम्र 73 साल हो गई है. उनकी पत्नी ने पहली बार 1985 में दहेज प्रताड़ना का प्रकरण कोर्ट में दायर किया. फिर 2019 तक अलग अलग एक्ट के तहत 10 अर्जियां दी. इसमें से 8 बार भरण-पोषण के तहत प्रकरण दर्ज कराया. 1985 से लेकर 2017 तक 3 बार दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का केस दर्ज कराया. इसके अलावा अलग-अलग थानों में 31 से ज्यादा बार मारपीट करने के आवेदन दिए. साहू ने पत्नी के अलग होने के और कोर्ट से जीते केसों के हर आदेश के दस्तावेज एसडीएम कोर्ट पेश किए हैं.

Related Articles