छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बेटी के भरण-पोषण की कानूनी और नैतिक जिम्मदारी से बच नहीं सकते पिता

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल ने कहा कि अविवाहित बेटी की देखभाल, भरण-पोषण और शादी का खर्च उठाने से पिता पीछे नहीं हट सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि बेटी का पालन-पोषण, शिक्षा और शादी का खर्च उठाना पिता का पवित्र कर्तव्य है, जिससे वह इनकार नहीं कर सकता। कन्यादान हिंदू पिता का नैतिक जिम्मेदारी है। इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने शिक्षक पिता की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने बेटी को हर माह 2500 रुपए भरण-पोषण और शादी के लिए 5 लाख रुपए देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखा।

See also  खेतों में भीषण आग : 10-15 एकड़ गेहूं-सरसों की खड़ी फसल जलकर खाक, किसानों को भारी नुकसान

दरअसल, सूरजपुर की 25 वर्षीय युवती ने फैमिली कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था, जिसमें बताया कि गया था कि मां की मौत के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली। अब वह अपनी पहली बेटी का ध्यान नहीं रखते। पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं और हर महीने 44,642 रुपए वेतन पाते हैं। बेटी ने कोर्ट से हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 और 3(बी) के तहत आवेदन कर भरण-पोषण और विवाह खर्च की मांग की। कोर्ट ने बेटी का तर्क सुनने के बाद 2 सितंबर 2024 को आदेश दिया कि पिता बेटी की शादी होने तक हर महीने 2500 रुपए भरण-पोषण देगा। साथ ही शादी के लिए 5 लाख रुपए देने का भी आदेश दिया।

See also  1 अप्रैल से शुरू होगा राजस्व पखवाड़ा : गांव-गांव में लगाए जाएंगे शिविर, समस्याओं का तुरंत होगा समाधान 

फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ पिता ने हाईकोर्ट में अपील की। इसमें तर्क दिया कि कि सुप्रीम कोर्ट के रजनीश बनाम नेहा केस के मुताबिक, दोनों पक्षों ने शपथ पत्र नहीं दिया, इसलिए आदेश गलत है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि बेटी अविवाहित है। खुद का भरण-पोषण नहीं कर सकती। अधिनियम की धारा 3 (बी) (ई) में अविवाहित बेटी की शादी के खर्च को भी भरण-पोषण की परिभाषा में रखा गया है।

See also  फल दुकान में घुसा तेज रफ्तार ट्रक, एक की मौत, कई लोग घायल

हाईकोर्ट ने पूनम सेठी खिलाफ संजय सेठी केस में दिए गए फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि एक पिता अपनी अविवाहित बेटियों की देखभाल की अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। भरण-पोषण करने और उनके खर्चों, जिसमें उनकी शिक्षा और विवाह पर खर्च का ध्यान रखने का कर्तव्य और दायित्व है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट में पिता की ओर से आश्वासन दिया गया कि वह बेटी को हर माह भरण-पोषण देगा और शादी के लिए 5 लाख 3 माह के भीतर जमा कर देगा।

Related Articles

Leave a Reply