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महंगाई का दिल से निकाल दीजिये ख्याल, खुशखबरी लेकर आया नया साल

नई दिल्ली

अगर आपके मन में देश में महंगाई को लेकर जरा सी भी शंका है, तो उसे अपने मन से निकाल दीजिए. नया साल 2025 महंगाई पर खुशखबरी लेकर आया है. जनवरी के महीने में रिटेल महंगाई में 0.91 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. खास बात तो ये है कि अगस्त 2024 के बाद देश में रिटेल महंगाई सबसे कम देखने को मिली है. आंकड़ों को देखें तो जनवरी 2025 में महंगाई की दर 4.50 फीसदी से नीचे आ चुकी है.जबकि रॉयटर्स पोल में महंगाई का अनुमान 4.6 फीसदी का लगाया गया था. वास्तव में खाद्य महंगाई 6 फीसदी करीब आ गई है. जिसकी वजह से ओवरऑल महंगाई में गिरावट देखने को मिली है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर सरकार की ओर से रिटेल महंगाई के आंकड़े किस तर​ह के जारी किए हैं.

महंगाई हुई धराशाई
खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों में कमी के कारण भारत की खुदरा महंगाई जनवरी में घटकर 4.31 प्रतिशत हो गई, जो दिसंबर में 5.22 प्रतिशत थी. रॉयटर्स के एक सर्वे में अनुमान लगाया गया था कि जनवरी में भारत की महंगाई गिरकर 4.6 प्रतिशत हो जाएगी. महंगाई में गिरावट भारतीय परिवारों के लिए राहत की खबर है, जो अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा खाने-पीने पर खर्च करते हैं.

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महंगाई में तेज गिरावट का भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा भी स्वागत किया जाएगा, जिसने पिछले सप्ताह के अंत में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर 6.25 फीसदी की है. ग्रामीण महंगाई दिसंबर में 5.76 फीसदी की तुलना में बढ़कर 6.31 फीसदी हो गई, जबकि शहरी महंगाई पिछले महीने के 4.58 के मुकाबले 5.53 फीसदी रही. भारत की खुदरा महंगाई अक्टूबर में 14 महीने के उच्चतम स्तर 6.2 फीसदी पर पहुंच गई थी, खाद्य महंगाई 15 महीने के उच्चतम स्तर 10.9 फीसदी पर पहुंच गई थी.

खाद्य महंगाई में आई कमी
वहीं दूसरी ओर खाद्य महंगाई की बात करें तो जो कुल कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी सीपीआई बास्केट का लगभग आधा हिस्सा है, दिसंबर में 8.39 फीसदी से घटकर जनवरी में 6.02 फीसदी हो गई, जो अगस्त, 2024 के बाद सबसे कम है. स्थानीय बाजारों में पहुंचने वाली ताजा सर्दियों की उपज से खाद्य कीमतों में वृद्धि कम हो गई है, जो सीपीआई बास्केट का लगभग आधा हिस्सा है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में सब्जियों की कीमतों में गिरावट ने संभवत: सबसे अधिक योगदान दिया है.

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एचडीएफसी बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा कि गेहूं और वनस्पति तेल (कीमतों) के अलावा, अन्य सभी खाद्य कैटेगिरी में नरमी के संकेत दिख रहे हैं. खाद्य कीमतों में नरमी, जो आमतौर पर सर्दियों के महीनों के दौरान देखी जाती है, को स्वस्थ खरीफ (शरद ऋतु) उत्पादन से भी समर्थन मिलता है. तेजी से गिरती महंगाई भी केंद्रीय बैंक को धीमी आर्थिक वृद्धि को संबोधित करने पर अपने नए फोकस में कुछ छूट देती है क्योंकि ओवरऑल महंगाई अभी भी अपने 4 के लक्ष्य से ऊपर है.

महंगाई पर आरबीआई
आरबीआई एमपीसी ने पिछले हफ्ते कहा था कि खाद्य पदार्थों पर अनुकूल दृष्टिकोण के कारण महंगाई में गिरावट आई है और वित्त वर्ष 2026 में इसके नरम होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय परिवारों को और राहत मिलेगी. आरबीआई का लक्ष्य महंगाई को 2-6 फीसदी लक्ष्य सीमा के भीतर रखना है. नए गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​के नेतृत्व में आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई 4.2% रहने का अनुमान लगाया है.

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वित्त वर्ष 2026 की चार तिमाहियों के लिए, RBI MPC ने पहली तिमाही में महंगाई 4.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है; दूसरी तिमाही में 4 फीसदी पर; तीसरी तिमाही में 3.8 फीसदी और चौथी तिमाही में 4.2 फीसदी का अनुमान लगाया गया है. मल्होत्रा ​​ने कहा था कि महंगई अक्टूबर 2024 में 6.2% के शिखर से घटकर नवंबर-दिसंबर में निचले स्तर पर आ गई है, जिसका मुख्य कारण सब्जियों की गिरती कीमतें हैं. इसलिए 2024-25 के लिए सीपीआई महंगाई 4.8% अनुमानित की गई है, सामान्य मानसून को देखते हुए 2025-26 में इसमें और कमी आने की उम्मीद है.

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