छत्तीसगढ़जांजगीर चांपा

एक करोड़ 62 लाख रुपए से अधिक सायबर धोखाधड़ी, 100 से अधिक संदिग्ध खातों की हुई पहचान, 3 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस पुलिस अधीक्षक जांजगीर चांपा के निर्देशन एवं श्री उमेश कुमार कश्यप अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जांजगीर एवं श्री यदुमणि सिदार SDOP चांपा के मार्गदर्शन में ’’म्यूल अकाउंट’’ के विरूद्ध साइबर क्राईम पोर्टल में रिपोर्टेड म्यूल बैंक अकाउंट की जांच करने हेतु योजना तैयार कर साइबर टीम जांजगीर को निर्देशित किया गया था। प्रारम्भिक जांच पर नेशनल साइबर क्राईम पोर्टल में संदिग्ध्य पाये गय बैंक खातो को चिन्हांकित किया गया है ’’म्यूल बैंक’’ अकाउंट की जांच की गई।

जांच कार्यवाही में पीड़ितों की पहचान कर उनसे घटना के संबंध में जानकारी एकत्र किया गया। साइबर क्राईम पोर्टल की रिपोर्ट, बैंक खाता में हुए ट्रांजेक्शन, एक ही व्यक्ति के अधिक बैंक अकाउंट एवं अन्य तकनीकी साक्ष्य के आधार पर बैंक अकाउंट खुलवाने तथा अकाउंट का डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फर्जी ऐप, क्रिप्टो करेंसी में इन्वेस्ट, गूगल रिव्यू टास्क, टेलीग्राम टास्क, बैंक केवाईसी अपडेट एवं गूगल सर्च जैसे साइबर अपराध में उपयोग करने वाले लोगों को चिन्हांकित किया गया। जिले के सायबर टीम एवं थाना चांपा से पुलिस अधिकारी व कर्मचारियोें की अलग अलग टीमें बनाकर आरोपियों की पतासाजी करते हुये 03 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

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गिरफ्तार आरोपी

  1. पंकज कुमार खूंटे 25 वर्ष निवासी कवली केनापाली थाना डभरा जिला सक्ति
  2. बलराम यादव उर्फ बल्लू पिता फिरत राम 29 वर्ष निवासी जैजेपुर जिला सक्ति
  3. हरीश यादव उम्र 31 वर्ष निवासी जैजैपुर जिला सक्ति

उपरोक्त कार्यवाही में निरीक्षक जय प्रकाश गुप्ता थाना प्रभारी चाम्पा, निरीक्षक सागर पाठक साइबर सेल प्रभारी, साइबर टीम सउनि विवेक सिंह, प्र.आर. मनोज तिग्गा, विवेक सिंह, आर. आनंद सिंह, माखन साहू, शहबाज खान, प्रदीप दुबे, रोहित कहरा थाना चाम्पा से उप निरीक्षक बेलसज्जर लकड़ा, सउनि. ज्ञान प्रकाश खाखा का सराहनीय योगदान रहा।

जांजगीर चांपा पुलिस की अपील:-

क्या होता है ’’मनी म्यूल’’:-

’’मनी म्यूल’’ उस व्यक्ति को कहते है जिसके बैंक अकाउंट, डिजिटल वॉलेट या अन्य वित्तीय माध्यमों का उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम या अवैध धन को को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसफर करने में करते हैं।

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’’मनी म्यूल’ के काम करने का तरीका:-

  • साइबर अपराधी गैरकानूनी तरीकों से पैसे प्राप्त करते हैं।
  • ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए उनको बैंक खाते या वॉलेट की जरूरत पड़ती है, इसके लिए ठग मनी म्यूल बनाते है, किसी व्यक्ति को पैसा नौकरी, इनाम या निवेश का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं।
  • मनी म्यूल अवैध धन को अपने खाते से किसी और खाते में भेजता है, जिससे अपराधियों की पहचान छिपी रहे।
  • आसान और जल्दी पैसा कमाने का लालच व साइबर अपराधियो के प्लान को नही समझ पाने के कारण लोग मनी म्यूल बन जाते है।

’’कानूनी कार्यवाही’’

  • अगर आप मनी म्यूल हो बेनिफिशियरी खाते के रूप में आप पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लग सकते हैं।
  • बैंक खाते और संपत्तियों को जप्त किया जा सकता है।
  • जेल या जुर्माना लगाया जा सकता है, भले ही वह व्यक्ति अनजाने में शामिल हुआ हो।
  • धारा 3(5) बी.एन.एस. के तहत मनि म्युल भी उस अपराध के लिए उतना ही जिम्मेदार होगा जितना की मुख्य अपराधी।
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’’बचने के उपाय’’

  • अनजान स्रोतों से धन प्राप्त करने से बचें।
  • अपने बैंक खाते और वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखें।
  • यदि आपके खाते में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत संबंधित बैंक या पुलिस को सूचित करें। ’’मनी म्यूल’’ बनना एक गंभीर अपराध है’, अगर आप अपने खाते को सर्विस चार्ज के बदले बेचते हो, उपयोग करने देते हो, आप इसे जानबूझकर करें या अनजाने में, कभी कभी साइबर ठगी के मामले में ठग आपको लाभ पहुंचाने के लिए ठगी की रकम किसी अन्य खाते से छल पूर्वक आपके खाते में ट्रांसफर कर देते है, आपको लगता है की आपने किसी स्कीम के तहत इनाम या निवेश में मुनाफा या अन्य वजह से आपके खाते में पैसा आया है लेकिन रकम विवादित हो सकता है जिससे आपका खाता फ्रीज भी हो सकता है।

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