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बैंक में गार्ड की दबंगई! उपभोक्ता को धक्का देकर बाहर निकाला, प्रबंधन पर उठे सवाल

जांजगीर–चांपा। क्या अब बैंक में गार्ड ही तय करेगा, किसे सेवा मिलेगी और किसे नहीं? शिवरीनारायण, छत्तीसगढ़ से एक चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है, जहां छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में न मैनेजर, न काउंटर कर्मचारी, बल्कि बैंक के बाहर खड़ा गार्ड खुद को पूरा बैंक प्रबंधन समझ बैठा!

जांजगीर–चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक में ग्राहकों से बदतमीजी अब आम बात होती जा रही है, लेकिन इस बार हद तब पार हो गई, जब गार्ड ने खुलेआम एक उपभोक्ता को बैंक से धक्का देकर बाहर निकाल दिया। बता दे कि पीड़ित दिलीप कुमार साहू, ग्राम पंचायत गोधना निवासी और ग्राम प्रमुख अपनी दिवंगत माता जी के खाते की जानकारी लेने बैंक पहुंचे थे। जहां कुछ समय पहले माता जी का निधन हो चुका है, खाते में पैसे मौजूद हैं और नॉमिनी होने के नाते वे सिर्फ खाता चेक करने गए थे। लेकिन बैंक में प्रवेश करते ही जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया।

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जहां पीड़ित दिलीप कुमार साहू ने अभद्र भाषा, धमकी और बैंक से बाहर निकालने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि बैंक के गार्ड ने न सिर्फ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, बल्कि यह तक कह दिया— “मैं ही बैंक का प्रबंधन हूं, मैं ही सब कुछ हूं, जो बात करनी है मुझसे करो, तुम्हें कोई जानकारी नहीं दी जाएगी! इतना ही नहीं, गार्ड ने उपभोक्ता को जबरन बैंक से बाहर निकाल दिया।

सवालों के घेरे में बैंक प्रबंधन क्या गार्ड को ग्राहकों को अपमानित करने का अधिकार है? क्या नॉमिनी को खाते की जानकारी लेना गुनाह है? क्या ग्रामीण बैंक अब आम जनता के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारियों की तानाशाही के लिए चल रहा है? पीड़ित दिलीप कुमार साहू ने मीडिया के सामने आकर शासन और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और मांग की है कि— आरोपी कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई हो, बैंक में आम जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

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अब सवाल सरकार से, क्या सरकार इस बैंक के “रुतबेदार गार्ड” पर कार्रवाई करेगी? या फिर ग्रामीण बैंक ऐसे ही आम जनता का अपमान करता रहेगा?

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