छत्तीसगढ़

सक्ती : फर्जी अंकसूची के जरिए शिक्षाकर्मी की नौकरी कर रहे चितरंजन कश्यप को 04 साल की सजा

सक्ती। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर राजेश खलखो ने कूट रचित अंकसूची और फर्जी खेलखुद के प्रमाण पत्र का उपयोग कर शिक्षाकर्मी की नौकरी पाने के आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप को अलग अलग धाराओं में तीन एवं एक – एक वर्ष सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।

सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी जांजगीर (वर्तमान प्रभारी जैजैपुर) एस. अग्रवाल द्वारा से मिली जानकारी के मुताबिक आरोपी चितरंजन प्रसाद कश्यप पिता धोबीलाल निवासी ग्राम मरघट्टी थाना हसौद द्वारा वर्ष 2007 में माल्दा स्थित पीतांबर हायर सेकेंडरी स्कूल से हायर सेकेंडरी की विज्ञान विषय पर परीक्षा दिया था जिसमें उसका वास्तविक परीक्षाफल भौतिकी विषय पर सप्लीमेंट्री होकर पूर्णांक कुल 500 में प्राप्तांक 257 था परंतु आरोपी द्वारा उसी वर्ष शिक्षाकर्मी पद हेतु आवेदन फॉम पर अपना हायर सेकेंडरी की परीक्षाफल आवेदन विवरण में पूर्णांक कुल 500 में 405 अंक प्राप्त होना उल्लेख करते हुए आवेदन के साथ प्रस्तुतन फर्जी अंक सूची जिसमें भौतिकी विषय सप्लीमेंट्री के स्थान पर डिस्टेंसन सहित अन्य विषयों के प्राप्तांक को बढ़ाते हुए फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर नौकरी कर रहा था।

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वर्ष 2018 में ग्राम सेमरिया थाना जैजैपुर निवासी पोथीराम कश्यप द्वारा आरोपी चितरंजन कश्यप द्वारा फर्जी अंक सूची एवं खेलकूद के कूट रचित प्रमाण पत्र का उपयोग कर शिक्षाकर्मी की नौकरी प्राप्त करने की शिकायत लिखित में पुलिस अधीक्षक जांजगीर को किए जाने पर शिकायत जांच दौरान थाना हसौद द्वारा शिकायत सही पाने पर आरोपी के विरुद्ध धारा 420, 467, 468, 471, 474 भादवि के तहत अपराध पंजीबद्ध बाद विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र वर्ष 2019 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर में पेश किया गया।

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न्यायालय में विचारण दौरान गवाह के परीक्षण प्रतिपरीक्षण बाद न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर राजेश खलखो ने आरोपी चितरंजन कश्यप को हायर सेकेंडरी की फर्जी अंकसूची और खेलकूद का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर शिक्षाकर्मी पद के आवेदन पर  मिथ्या परीक्षाफल लेख कर नौकरी पाने का दोषी पाते हुए आरोपी चितरंजन कश्यप को धारा 420 भादवि में 02 वर्ष,धारा 467/471 भादवि  में 03 वर्ष,धारा 468 में 01 वर्ष एवं धारा 474  में 01 वर्ष सश्रम कारावास व अर्थदंड  की सजा सुनाई साथ ही अर्थदंड की राशि अदा न करने पर पृथक से कारावास का आदेश दिया।

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