आप भी AI चैटबॉट का करते हैं ज्यादा उपयोग? हो जाएं सावधान, कम हो सकता है ज्ञान और सोचने-समझने की क्षमता

आप ChatGPT, Gemini, Claude, या Grok जैसे AI चैटबॉट के साथ अक्सर बातचीत करते हैं तो ना सिर्फ आप गलत जानकारी पर भरोसा करने लगते हैं, बल्कि समय के साथ-साथ आपका ज्ञान और सोचने-समझने की क्षमता भी कम हो जा सकती है। ऐसा हमारा नहीं बल्कि मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के रिसर्चर का कहना है। चैटबॉट से बात करते समय आपने एक पैटर्न देखा होगा। वे अक्सर आपकी बात से कुछ ज्यादा ही सहमत हो जाते हैं। यह शुरुआत में असरदार तो लगता हैं और आपके काम को जल्दी निपटा भी देते हैं, लेकिन यह सुविधा आपसे आपका असली ज्ञान छीन सकती है।
MIT रिसर्चर की चेतावनी

इंसान की सोच और ज्ञान पर एआई का क्या असर पड़ रहा है। इसके लिए MIT के शोधकर्ताओं ने चेतावनी जारी की है। MIT के दो हालिया पेपर्स में एक जैसी चिंता की ओर इशारा किया जा रहा है। पहले पेपर का टॉपिक इस बात पर जोर देता है कि जब AI सिस्टम लगातार यूजर्स के विचारों को सही ठहराते हैं, तो इससे एक ऐसा फीडबैक लूप बन सकता है जो समय के साथ गलत धारणाओं को और मजबूत करता है।
स्टडी में हुआ बड़ा खुलासा

इस चापलूसी वाले व्यवहार की स्टडी करने के लिए शोधकर्ताओं ने एक गणितीय मॉडल बनाया ताकि यह समझा जा सके कि चैटबॉट के साथ बातचीत करते समय यूजर्स अपनी धारणाएं कैसे बनाते हैं। स्टडी के दौरान, उन्होंने यूजर्स और AI सिस्टम के बीच हजारों बातचीत का सिमुलेशन किया। इस सेटअप में, यूजर्स ने AI के साथ अपनी बातचीत एक राय के साथ शुरू की और चैटबॉट के हर जवाब के बाद अपनी राय को अपडेट किया।
यूजर हो जाता है भ्रमित

जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, शोधकर्ताओं ने पाया कि चैटबॉट हमेशा निष्पक्ष नहीं रहता। हालांकि कभी-कभी यह संतुलित जवाब देता है, लेकिन अक्सर यह इस तरह से जवाब देता है जो यूजर के पहले से मौजूद विचारों को ही दोहराता और उनका समर्थन करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवहार एक ऐसा फीडबैक लूप बनाता है, जहां यूजर कोई विचार शेयर करता है, चैटबॉट उससे सहमत होता है। इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि रिसर्चर चेतावनी देते हैं कि इस तरह की भ्रामक सोच तार्किक और समझदार यूजर्स के साथ भी हो सकती है।
खत्म हो सकता है ज्ञान

बहुत ज्यादा मामलों में यह निर्भरता ज्ञान के खत्म होने का कारण भी बन सकती है, जहां इंसानों की आम समझ कम हो जाएगी। कुल मिलाकर, इन दोनों स्टडी से पता चलता है कि AI इंसानी ज्ञान और सोच को कैसे प्रभावित कर सकता है।




