जांजगीर चांपा

शासकीय अस्पतालों के डायलिसिस मरीज सावधान!

रायपुर

शासकीय डायलिसिस मशीन एवं मरीज अप्रशिक्षित हाथों में

शासन द्वारा धीरे-धीरे सभी विभागों में आऊटसोर्सिंग से घुसपैठ कर शासकीय विभागों का निजीकरण करने तैयार बैठी है। समाज के तीन प्रमुख आधार है, जिनकी सेवाएं अनदेखी नहीं की जा सकती है, वे है शिक्षा, पुलिस और स्वास्थ्य जिनमें स्वास्थ्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, और आज जबकि दुनिया के सभी सभ्य और लोकतांत्रिक देशों ने स्वास्थ्य सेवाओं को निशुल्क सेवाओं में रखा है, वहीं छत्तीसगढ़ सहित शायद पूरे भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का धीरे से निजीकरण शुरू हो गया है, जिसकी दस्तक आम लोग महसूस नहीं कर पा रहे हैं, अभी कुछ दिन पूर्व स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा शासन को एक आवेदन देकर प्रदेश के जिला चिकित्सालयो में स्थापित डायलिसिस यूनिट सेंटर में आऊटसोर्सिंग का विरोध किया था। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी प्रकोष्ठ संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार गुप्ता राष्ट्रीय संघ सदस्य ने बताया कि उन्हें सभी जिलों से ज्ञात करवाया जा रहा है, कि छत्तीसगढ़ के जिला चिकित्सालय में संचालित डायलिसिस यूनिट सेंटर को निजी हाथों में सौंप दिया है, जिससे अब डायलिसिस यूनिट सेंटर में आऊटसोर्सिंग से स्टाफ की भर्ती की जायेगी और कि गई है, जिससे आऊटसोर्सिंग से आने वाले टेक्नीशियन और डाॅक्टर के प्रशिक्षित और पात्रता की कोई गारंटी नहीं होगी, इसका सीधा असर जिला चिकित्सालय में आने वाले गरीब मरीजों की जान और स्वास्थ्य पर पड़ेगा, इन गरीब मरीजों के लिए लड़ने वाला भी कोई नहीं होगा, जिसका पूरा फायदा ठेकेदार उठायेंगे। बताया यह भी जा रहा है, कि डायलिसिस यूनिट सेंटर में एक या दो प्रशिक्षित और पात्र लोगों को लिया जा रहा है, बाकि कम या अप्रशिक्षित लोगों की भर्ती रुपए बचाने की जा रही है ।

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