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जांजगीर चांपा

सक्ती जिले का सबसे बड़ा जमीन घोटाला! प्रशासन उदासीन

शिकायत सही पाए जाने पर भी अब तक कार्यवाही आखिर क्यों नहीं ?

जैजैपुर।
बीते एक दशक से सक्ती जिले के एकमात्र वनक्षेत्र छितापंड़रिया-झालरौन्दा-खम्हरिया, बेल्ट की खनिजसम्पदा से परिपूर्ण बेशकीमती भूमि को भूमाफियाओं की नजर लग चुकी है जिनके द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों से मिलीभगत कर सैंकड़ों एकड़ शासकीय जमीन की खरीदी बिक्री से करोड़ों का वारा-न्यारा करते हुए बंदरबांट किया गया है जिसकी शिकायत अनेकों बार की जा चुकी है लेकिन शायद जाँच अधिकारियों की जेबें भी गर्म कर दी जा रही हैँ जिससे अब तक कोई भी रजिस्ट्री निरस्त नहीं की गई है जबकि जाँच के दौरान शिकायतकर्ता की शिकायत सही पाई गई है ।

झालरौन्दा में शासकीय बड़े झाड़ के जंगल की हो गई रजिस्ट्री व नामांतरण

एक ऐसे ही मामले की शिकायत शिकारीनार निवासी पत्रकार अनिल चंद्रा द्वारा मंत्रालय तक की गई थी जिसके लगभग दो वर्ष बाद जाँच दल गठित हुई और मौके पर जाँच दल पहुंची भी और जाँच पर शिकायत सही पाया गया लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं होना यह बताने के लिए काफी है कि मामला कहाँ और क्यों अटका है ।

तहसीलदार ने उच्चाधिकारियों को नहीं सौंपी फ़ाइल

यह बात अपने आप में चौंकाने वाली है कि जाँच के लगभग पखवाड़े भर बीत जाने के बाद भी तह्सील कार्यालय भोथिया से जाँच प्रतिवेदन अपने उच्चाधिकारियों को नहीं सौंपी गई है तो क्या तहसीलदार ही मामले को दबाने में लगे हुए हैँ और यादी ऐसा है तो आखिर उनकी कोई मजबूरी है या कोई स्वार्थ? क्योन्कि उक्त भूमि को खरीदने और बेचने वाले दोनों ही पक्ष बड़े नेताओं के करीबी माने जाते हैं।

अगले पांच साल में नहीं बचेगी कोई शासकीय जमीन

झालरौंदा गाँव में यह चर्चा आम हो चली है कि जिस गति से झालरौंदा और आसपास की जमीनों की बिक्री हो रही है और इतने शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होने से अगले पांच साल में सभी सरकारी जमीन खदान मालिकों के नाम होने से कोई नहीं रोक सकता है ।

शिकायतकर्ता अनिल कुमार चंद्रा की मानें तो बीते कुछ सालों में भूमाफियाओं पर कोई कार्यवाही नहींं होने से जैजैपुर और भोथिया तहसील अंतर्गत अनेकों शासकीय बेशकीमती जमीनों को शाजिश के तहत राजस्व अमलों व दलालों द्वारा पहले अपने लोगों के नाम पर दर्ज किया जाता है फिर मोटी रकम पर बड़े उद्योगपतियों को बेच कर आपस में बंदरबाँट किया जाता है जैसे कि पूर्व में आमगाँव स्थित भूमि का किया गया था । वर्तमान में छितापड़रिया, झालरौन्दा,खम्हरिया, अकलसरा, दर्राभांठा, आमगाँव एवं जैजैपुर की शासकीय जमीनों को राजस्व अमले के कुछ गद्दार लोग चंद पैसों की लालच में बिक्री होने में सहयोग कर रहे हैँ जिसकी यदि उच्च स्तर पर साय सरकार सांय सांय कार्यवाही करदे तो शासन को लाखों करोड़ों के राजस्व की हानि होने से बचाया जा सकता है ।

मुझे उक्त जमीन के मामले में कोई जानकारी नहीं है और ना ही मेरे द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया है
लालजी चंद्रा सरपंच - झालरौन्दा।
देखना पड़ेगा मुझे भी याद नहीं आ रहा है कि अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया हूँ या नहीं, आपको बाद मे बता पाऊंगा।
रामनारायण पटेल,पंचायत सचिव झालरौन्दा।

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