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फिल्मों में दिव्यांगों के फिल्मांकन को लेकर SC सख्त, जारी किए कई गाइडलाइंस

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म और विजुअल मीडिया में दिव्यांगों के चित्रण पर निर्माताओं को सख्त निर्देश जारी किया है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि सभी को विकलांगता पर अपमानजनक टिप्पणी या व्यंग्य करने से बचा जाना चाहिए. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि फिल्मों और वित्त चित्रों के जरिए दिव्यांगों का तिरस्कार नहीं किया जाना चाहिए बल्कि उनकी उपलब्धियों का प्रदर्शन किया जाना चाहिए.

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दिशा-निर्देश में ऐसे व्यक्तियों की सामाजिक अवमानना ​​का मुकाबला करने के लिए विकलांगता का चित्रण करने पर रोक नहीं लगाई जाएगी. विकलांगता पर व्यंग्य या अपमानजनक टिप्पणी से जुड़े मामले पर कोर्ट ने कहा कि शब्द संस्थागत भेदभाव पैदा करते हैं, अपंग जैसे शब्द सामाजिक धारणाओं में बेहद ही निचला स्थान रखते हैं.

यह बहुत ही गंभीर मसलाः CJI
CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि दिव्यांग लोगों से संबंधित मुद्दा बहुत ही गंभीरता और उनके अधिकार से जुड़ा हुआ है जो समानता और सम्मान के अधिकार से संबंधित है. यह मूल अधिकार का मसला है. ऐसे में फ्रेमवर्क का अनुपालन जरूरी है. हम दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं जो विजुअल मीडिया से संबंधित हैं. फिल्म प्रमाणन संस्था को स्क्रीनिंग की अनुमति देने से पहले विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए.

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सीजेआई ने आगे कहा कि हम विजुअल मीडिया पर दिव्यांगों को चित्रित करने के लिए एक रूपरेखा तैयार कर रहे हैं जो असंवेदनशील भाषा विकलांगों (PWD) के विपरीत है. जो भाषा उन्हें अपमानित करती है वह विकलांगों के प्रति सामाजिक उद्देश्यपरक व्यवहार को खराब करती है.

निपुण मल्होत्रा ने लगाई थी याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म आंख मिचौली में विशेष रूप से विकलांग लोगों का अपमानजनक चित्रण किए जाने से जुड़ी याचिका पर यह फैसला सुनाया. विकलांगता अधिकार कार्यकर्ता निपुण मल्होत्रा ​​की ओर से दायर जनहित याचिका पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाया. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष, अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई और पुलकित अग्रवाल उपस्थित हुए.

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सुनवाई के दौरान कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की ओर से पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता पराग पी त्रिपाठी फिल्म के निर्माता सोनी पिक्चर्स इंडिया की ओर से हाजिर हुए.

विकलांगों पर अपमानजनक टिप्पणी किए जाने से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं और साई विजुअल मीडिया के लिए कई सख्त दिशा-निर्देश भी जारी किया है.

ऐसे शब्द जो संस्थागत भेदभाव को जन्म देते हैं जैसे अपंग शब्द आदि नकारात्मक आत्म छवि को जन्म देते हैं.
वह भाषा जो सामाजिक बाधाओं को नजरअंदाज कर देती है.
रचनाकारों को रतौंधी जैसी नुकसान के बारे में पर्याप्त चिकित्सा जानकारी की जांच करनी चाहिए जो भेदभाव को बढ़ा सकती है.
यह मिथकों पर आधारित नहीं होना चाहिए… रूढ़िवादिता दर्शाती है कि विकलांग व्यक्तियों में संवेदी महाशक्तियां बढ़ी हुई होती हैं और यह सभी के लिए नहीं हो सकता है.
फैसले में एक समान भागीदारी की जानकारी होनी चाहिए. हमारे बिना कुछ नहीं सिद्धांत का पालन नहीं किया जाएगा.
पीडब्ल्यूडी के अधिकारों की रक्षा के लिए अधिकारों के सम्मेलन में उनके अधिकारों की वकालत करने वाले समूहों के साथ सलाह के बाद ही उन्हें चित्रित करने के उपाय शामिल हैं. फिर हमने प्रशिक्षण और संवेदीकरण कार्यक्रमों का उल्लेख किया है.

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