छत्तीसगढ़

बनने से पहले गायब हो गया प्राथमिक शाला भवन, बच्चों का भविष्य संवारने बेवा ने दे दिया अपना पीएम आवास…

गरियाबंद। जर्जर स्कूल भवनों के आपने बहुत से किस्से सुने होंगे, इनमें घूम-फिर के बात आखिरकार भ्रष्टाचार, जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता सामने आती है. ऐसा ही वाकया गरियाबंद जिले में एक प्रायमरी स्कूल का है, जो कागजों में तो सरकारी भवन में संचालित होता नजर आता है, लेकिन हकीकत में एक बेवा के पीएम आवास में संचालित है, जिसने जर्जर भवन में बच्चों की भविष्य खतरे में देख अपना पीएम आवास सौंपकर झोपड़ी में रहना मंजूर किया है.

बात हो रही है मैनपुर ब्लॉक के बीरीघाट पंचायत के चचरा पारा स्थित प्राथमिक स्कूल की, जिसका संचालन बेवा गुनो बाई के पीएम आवास में बीते तीन सालों से हो रहा है. हैरानी की बात है कि सिस्टम पर गुनो बाई के इस करारे तमाचा के बावजूद किसी जिम्मेदार ने 22 बच्चों वाले इस स्कूल की ओर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा. गुनो बाई का एक बेटा है, जिसके साथ वह बस्ती के भीतर अपनी पुरानी झोपड़ी में रह रही है. गुनो बाई कहती है कि बच्चे हमारे भविष्य हैं. जर्जर भवन वाले स्कूल में खतरा देखते हुए उसने अपने आवास को स्कूल संचालन के लिए दे दिया.

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बनने से पहले गायब हो गया भवन

गांव के पंच कपूर चंद मांझी जिम्मेदारों के एक और करतूत के बारे में खुलासा करते हुए बताते हैं कि 1997 में बने भवन में स्कूल संचालित हो रहा था. मांग के बाद 2006 में नए स्कूल भवन के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत 4.18 लाख की स्वीकृति मिली, भवन का जिम्मा पंचायत और मास्टर जी के जवाबदारी में बन रहा था. नींव और प्लिंथ खड़े हुए फिर अचानक से काम बंद हो गया. आज 10 साल बाद भवन का नामोनिशान तक नहीं है. पंच ने कहा कि नए भवन की मांग करने जाते हैं, तो रिकार्ड में भवन दिखता है इसलिए नए भवन नही मिला.

स्कूल जतन के लिए भी नहीं दिखाई रुचि

तमाम कोशिश के बीच जब पिछली सरकार के स्कूल जतन योजना के भवन मरम्मत की सूची में जब चचरापारा का नाम आया तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली. 1997 के जर्जर भवन के मरम्मत के लिए 10 लाख से ज्यादा की मंजूरी मिली थी, लेकिन यह काम भी प्रशासन नहीं करा पाया. बता दे कि मैनपुर ब्लॉक में 267 स्कूल भवन को जतन योजना के लिए चयन किया गया था, लेकिन सालभर में आरईएस विभाग केवल 66 भवन ही मरम्मत करा पाया.

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चचरापारा प्राथमिक शाला भवन के हालात से अनजान मैनपुर आरईएस एसडीओ उमेस चौधरी कहते हैं कि टेंडर जारी हुए थे, लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थिति के चलते आधा से ज्यादा काम शुरू नहीं हो सके.

90 करोड़ खर्च नहीं कर पाया आरईएस विभाग

स्कूल जतन योजना में गरियाबंद को 90 करोड़ दिया गया है. 1300 स्कूल भवनों की मरम्मत की जानी थी, लेकिन साल भर में 550 भवनों की ही मरम्मत हो पाई है. हैरानी की बात है कि खर्च का लेखा-जोखा शिक्षा विभाग देख रहा है, और काम की जिम्मेदारी आरईएस विभाग के पास है, लेकिन दोनों मिलकर स्कूलों के जतन में रुपए खर्च नहीं कर पाए हैं.

विधायक के आरोप के बाद निरीक्षण टीम गठित

बीते दिनों कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने कांग्रेस सरकार में मिले जतन योजना के खर्च में लापरवाही का बड़ा आरोप लगाया था, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने मरम्मत हो चुके भवन का परीक्षण-निरीक्षण करने जिले भर के तकनीकी अफसर व इंजीनियर की टीम को नोडल और जांच अधिकारी बनाया है. टीम जिले के पांच ब्लॉक में जतन योजना में 550 स्कूलों में हुए खर्च का परीक्षण करेगी. लेकिन जिस मरम्मत कार्य को शुरू नहीं किया गया, स्वीकृति राशि का उपयोग साल भर में क्यों नहीं हो सका, उसकी जांच के लिए अब तक कोई कमेटी नही बनाई गई है.

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दोबारा शुरू की जा रही है मरम्मत की प्रक्रिया

जिला शिक्षा अधिकारी आनंद सारस्वत कहते हैं कि कार्य प्रगति के आधार पर रुपए जारी हुए. जहां खर्च हुए उसका परीक्षण कराया जा रहा है. जिन भवनों के मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ है, उसे दोबारा शुरू कराए जाने की प्रक्रिया आरईएस विभाग करा रही है. जहां मरम्मत की मांग आ रही है, स्टीमेट मंगाकर मरम्मत की मंजूरी विधिवत दी जाएगी.

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