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जांजगीर-चांपा : इंडस्ट्रीयल कारीडोर की सड़क धंसी ठेकेदार ने आनन-फानन में गड्ढा भरवाया

जांजगीर-चांपा। अकलतरा और बलौदा के बीच भारत इंडस्ट्रीयल कारीडोर की सड़क कुछ दिन पहले खतरनाक तरीके से धंस गई है जिसे ठेकेदार ने आनन-फानन में कांक्रीट से भरवाया है ।

बताया जा रहा है कि बुचीहरदी बलौदा की सड़क जो कोसा बाड़ी केन्द्र के पास अवस्थित है , वो सड़क अचानक धंस गयी है जिसे सुबह-सुबह गांव के लोगों ने देखा और विडियो बनाकर वायरल किया है जिसे देखकर ठेकेदार ने जल्दी-जल्दी कांक्रीट से भरवाया है लेकिन प्रश्न यह उठता है कि आखिर यह गड्ढा कैसे हुआ और क्यों हुआ है क्योंकि यह गड्ढा भूस्खलन से हुआ गड्ढा नहीं लग रहा है । लगभग तीन फीट यह गड्ढा अंदर से खोखला दिखाई दे रहा है जिसमे गांव के युवकों ने बेशरम के पेड़ से गहराई मापने की कोशिश की है ।

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दरअसल यहां से गेल इंडिया की प्राकृतिक गैस पाइपलाइन भी गुजरी है जिसे देखते हुए सड़क और मजबूत बनानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ । विदित हो कि कटघोरा से लेकर अकलतरा तक बनने वाली यह सड़क आज भी अपने पूरा होने का इंतजार करते-करते में जर्जर होना शुरू हो गई है । 1.46 करोड़ की लागत से बनने वाली यह इंडस्ट्रीयल कारीडोर को नेशनल हाईवे से जोड़ा गया है और इसका ठेका जयसिंह अग्रवाल पूर्व राजस्व मंत्री के साले को मिला था जिसने अकलतरा से बलौदा तक की सड़क को ही तीन पेटी कान्ट्रैक्टर को दिया था और तीनों ही ठेकेदारो ने सड़क की दूर्गति करने में कोई कसर नही छोड़ी है और इसका पूरा साथ जिले की जिम्मेदार अभियंताओं ने दिया है जिन्हें सड़क में कोई खामियां नजर नहीं आयी ।

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अकलतरा से बलौदा तक बनी सड़क में सड़क के दोनों ओर नालियां बननी थी लेकिन नाली नहीं बनी जिसके अभाव में अकलतरा का डंगरापारा बरसात में नाली और सड़क के पानी से नहाता है इस सड़क के दोनों ओर शोल्डर बनाया जाना था लेकिन दोनों ओर शोल्डर का अभाव है लेकिन कहने के लिए कहीं-कहीं पर शोल्डर मुरूम से बनाया गया है जहां कुछ दिन पहले एक चार पहिया फंस गया था ।

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विधानसभा चुनाव के पहले इस सड़क को लेकर आये दिन नेताओं के हंगामे होते और इस दौरान चार से पांच इंजीनियर बदले गए और अब ठेकेदार नाली बनाने के सवाल पर स्थानीय राजनीति को दोष देकर खुद को दोषमुक्त कर रहा है लेकिन दोष किसी का भी हो , ठेकेदार, नेता और अधिकारी की त्रिमूर्ति का भार अंततोगत्वा जनता को ही झेलना पड़ता है और इस गड्ढे में जान किसी आम आदमी की ही जायेगी तब प्रशासन अपनी छहमासी कुंभकर्णी नींद से जागेगा और लोगों के हल्लाबोल के बाद फिर सुख स्वप्न की नींद में खो जायेगा ।

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