छत्तीसगढ़

मिड-डे मील रसोइयों का आंदोलन: शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव, सरकार ने कहा- दो मौतों को धरना स्थल से जोड़ना गलत

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल और D.Ed अभ्यर्थियों के विरोध ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले के बाहर जुट गए। दूसरी ओर, इन्हीं प्रदर्शनों के बीच दो रसोइयों की मौत को धरना स्थल से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर फैली खबरों का राज्य सरकार ने कड़ा खंडन किया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया कि दोनों मौत का आंदोलन या धरना स्थल से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

लोक शिक्षण संचालनालय के अनुसार जिस पहली रसोइया की मौत बताई जा रही है, वह बालोद जिले की निवासी थी। वह 20 और 21 जनवरी को धरने में शामिल हुई थी, लेकिन बाद में अपने घर लौट गई। वहीं उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उसे दल्ली राजहरा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आज उपचार के दौरान उसकी मौत हुई।

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दूसरी रसोइया बेमेतरा जिले के बेरला क्षेत्र की रहने वाली थी, जो पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। उसे भिलाई के शंकराचार्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था और वहीं इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हुई। प्रशासन ने कहा कि दोनों ही मामलों में ‘धरना स्थल पर मौत’ जैसा कोई तथ्य मौजूद नहीं है।

रसोइयों के प्रतिनिधियों की बैठक संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से हुई। चर्चा के दौरान सरकार ने रसोइयों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए मानदेय में 25% यानी 500 रुपये की बढ़ोतरी की जानकारी दी तथा हड़ताल समाप्त कर घर लौटने का आग्रह किया।

रसोइयों की मांगें
इसके बावजूद कई रसोइया प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं, जिससे आंदोलन और तीखा हो गया है। प्रदेश के लगभग 86,000 रसोइया, जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं, मानदेय बढ़ोतरी और रोजगार सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर सड़कों पर डटे हैं।

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हड़ताल स्थल पर कई रसोइयों को संक्रमण, सर्दी-खांसी और सिरदर्द जैसी समस्याओं के चलते डॉक्टरों की मदद लेनी पड़ी है। प्रशासन ने बताया कि एक प्रदर्शनकारी की हालत नाजुक बनी हुई है, जिसके चलते आंदोलन को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

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