पोरा बाई नकल कांड में 17 साल बाद इंसाफ, टॉपर बनने का सच उजागर, चार दोषियों को 5-5 साल की सजा

जांजगीर-चांपा जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाले पोरा बाई नकल प्रकरण में आखिरकार 17 साल बाद बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है। वर्ष 2008 के इस चर्चित मामले में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जी.आर. पटेल के न्यायालय ने अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद छात्रा पोरा बाई सहित चार आरोपियों को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने छात्रा पोरा बाई के साथ-साथ फूल साय नृशी, एस.एल. जाटव और दीपक जाटव को उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी और परीक्षा प्रक्रिया से खिलवाड़ का दोषी माना है। यह मामला तब सुर्खियों में आया था, जब सरस्वती शिशु मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल, बिर्रा परीक्षा केंद्र से परीक्षा देने वाली पोरा बाई ने 500 में से 484 अंक प्राप्त कर प्रदेश की प्रावीण्य सूची में पहला स्थान हासिल किया था।

असामान्य रूप से उत्कृष्ट परिणाम आने के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर को संदेह हुआ। विस्तृत जांच में उत्तर पुस्तिकाओं में गंभीर गड़बड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी की पुष्टि हुई। इसके बाद थाना बम्हनीडीह में मामला दर्ज कर पुलिस ने चालान पेश किया। हालांकि उस समय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, चांपा ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया था।

शासन की ओर से इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की गई थी। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश जी.आर. पटेल ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए दोषियों को सजा सुनाई है।
अपने फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह अपराध केवल माध्यमिक शिक्षा मंडल के खिलाफ नहीं, बल्कि उन हजारों मेहनती और ईमानदार छात्रों के भविष्य के साथ किया गया धोखा है, जो निष्पक्ष प्रतियोगिता के भरोसे आगे बढ़ते हैं। यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने वाला मील का पत्थर माना जा रहा है।




