छत्तीसगढ़

राज्यसभा चुनाव 2026: छत्तीसगढ़ से बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को बनाया उम्मीदवार

नई दिल्ली/ रायपुर/ बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव के लिए अप्रैल 2026 में दो सीटें खाली हो रही है. बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव के लिए लक्ष्मी वर्मा को मैदान में उतारा है. लक्ष्मी वर्मा ने नारायण चंदेल और डॉक्टर कृष्णमूर्ति बांधी को पीछे छोड़ इस रेस में बाजी मार ली है. बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को टिकट दिया है. इसके साथ ही बीजेपी ने छत्तीसगढ़ के मातृ शक्ति पर भरोसा जताया है.

कौन कौन नेता थे रेस में शामिल ?

राज्यसभा चुनाव 2026 के रेस में बीजेपी की तरफ से लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल, कृष्णमूर्ति बांधी, भूपेंद्र सवन्नी, सरोज पांडेय और किरण बघेल जैसे नेता शामिल थे. इन सभी नेताओं में बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को मैदान में उतारा है. बीजेपी में काफी समय से महिला उम्मीदवार को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाने की चर्चा थी. इस चर्चा को पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा के नाम के साथ फाइनल किया है.

BJP list of candidates for Rajya Sabha elections

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की कितनी सीटें ?

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की कुल 5 सीटें हैं. अभी इनमें से 2 सीटों पर राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल साल 2028 में खत्म होगा और एक राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल साल 2030 में खत्म होगा. जिन दो राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है उनमें फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी शामिल हैं. ये दोनों नेता कांग्रेस पार्टी से हैं. इसके अलावा दो और राज्यसभा सांसद कांग्रेस पार्टी से हैं. जिसमें राजीव शुक्ला और रंजीत रंजन हैं. बीजेपी से देवेंद्र प्रताप सिंह राज्यसभा सांसद हैं.

बीजेपी ने महिला शक्ति और अनुभव पर जताया भरोसा

बीजेपी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक सक्रियता और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है. लक्ष्मी वर्मा लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़ी रही हैं और जमीनी स्तर से लेकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक विभिन्न दायित्व निभा चुकी हैं. उनके नाम की घोषणा के साथ ही प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है,

लक्ष्मी वर्मा का सियासी सफर

बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के ग्राम मुड़पार की निवासी लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक लंबा है. उन्होंने 1990 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की और लगातार संगठन के लिए सक्रिय रहीं. उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ को देखते हुए उन्हें वर्ष 2000 में रायपुर से सांसद रहे रमेश बैस का सांसद प्रतिनिधि बनाया गया. यह उनके राजनीतिक जीवन का अहम मोड़ माना जाता है, जहां से उन्हें व्यापक राजनीतिक अनुभव मिला. साल 2001 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा कार्य समिति का सदस्य बनाया गया. इस जिम्मेदारी को उन्होंने चार वर्षों तक निभाया और महिला कार्यकर्ताओं के बीच संगठन को मजबूत किया.

See also  जांजगीर-चांपा में होली पर हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था, तीन जापानी तकनीक वाले ड्रोन से संवेदनशील इलाकों की निगरानी, भीड़भाड़ व ट्रैफिक पर रहेगी पुलिस की हवाई नजर

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

संगठन में लगातार सक्रिय भूमिका निभाने के कारण 2010 में उन्हें भाजपा पंचायती राज प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्य समिति का सदस्य बनाया गया. यह जिम्मेदारी उन्होंने 2014 तक संभाली। इसी अवधि में वे भाजपा महिला मोर्चा कार्य समिति की सदस्य भी रहीं और 2022 तक इस पद पर सक्रिय रहीं. प्रदेश स्तर पर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं. साल 2021 से साल 2025 तक वे भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष रहीं. इस दौरान उन्हें गरियाबंद संगठन प्रभारी और पार्टी की मीडिया प्रवक्ता का दायित्व भी सौंपा गया. पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक मजबूत वक्ता, संगठनकर्ता और सामाजिक समीकरणों को समझने वाली नेता के रूप में रही है.

निर्वाचित और संवैधानिक पदों का अनुभव

लक्ष्मी वर्मा ने केवल संगठनात्मक राजनीति ही नहीं की, बल्कि जनप्रतिनिधि के रूप में भी अपनी पहचान बनाई. साल 1994 में वे रायपुर नगर पालिका निगम के वार्ड क्रमांक 7 से पार्षद निर्वाचित हुईं. यह उनका पहला निर्वाचित पद था, जहां से उन्होंने स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय काम किया. साल 2010 में वे रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष चुनी गईं. जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर काम किया. साल 2019 में उन्हें स्टील मंत्रालय के अंतर्गत एफएसएनएल में स्वतंत्र निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने औद्योगिक और प्रशासनिक स्तर पर अनुभव हासिल किया. वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य के रूप में संवैधानिक दायित्व निभा रही हैं. महिला आयोग में उनकी भूमिका महिला अधिकारों और शिकायतों के समाधान से जुड़ी रही है.

सामाजिक क्षेत्र में मजबूत पकड़

लक्ष्मी वर्मा की पहचान केवल राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं है. सामाजिक संगठनों में उनकी सक्रियता ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई है.1998 में वे शक्ति महिला मंच रायपुर की अध्यक्ष बनीं. महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके प्रयासों को देखते हुए 1999 में नेहरू युवा केंद्र रायपुर द्वारा जिला युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया. साल 2004 में उन्हें श्रम पुनर्वास समिति जिला रायपुर का सदस्य मनोनीत किया गया। 2009 से वे मजदूर यूनियन छत्तीसगढ़ एकता मजदूर कल्याण संघ की प्रधान संरक्षक हैं.

See also  होली पर सजा नगाड़ा बाजार, ग्राहकी को लेकर मायूस दिखे दुकानदार

साल 2011 से वे कुटुंब न्यायालय रायपुर में परामर्शदाता सदस्य के रूप में कार्य कर रही हैं. पारिवारिक विवादों के समाधान में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है. इसके अलावा किसान संघर्ष समिति रायपुर में विशेष आमंत्रित सदस्य और अखिल भारतीय पंचायत परिषद की राष्ट्रीय महासचिव के रूप में भी वे सक्रिय हैं. छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड की उपाध्यक्ष के रूप में युवाओं से उनका जुड़ाव बना हुआ है.

सामाजिक समीकरण और समुदाय में प्रभाव

लक्ष्मी वर्मा की मनवा कुर्मी समाज में मजबूत पैठ मानी जाती है. वे 2000 से 2006 तक मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज की प्रदेश महिला महामंत्री रहीं. इसके बाद 2006 से 2008 तक प्रदेश संगठन मंत्री और 2008 से 2010 तक प्रदेश महिला अध्यक्ष रहीं.वर्तमान में वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की महिला राष्ट्रीय महासचिव हैं. सामाजिक संगठनों में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें जमीनी स्तर पर मजबूत आधार दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा के लिए उनका चयन सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव के संतुलन को दर्शाता है.

पार्टी का रणनीतिक फैसला

भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए जिन नामों की घोषणा की है, उनमें छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा का चयन कई संदेश देता है. पार्टी ने महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने, सामाजिक समीकरण साधने और अनुभवी संगठनकर्ता को संसद भेजने का संकेत दिया है. राज्यसभा में प्रदेश की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी. संगठन में लंबे अनुभव और प्रशासनिक समझ के कारण उनसे सक्रिय भूमिका की अपेक्षा की जा रही है.

समर्थकों में उत्साह

उनके नाम की घोषणा के बाद समर्थकों और कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है. बलौदाबाजार, सिमगा और रायपुर क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है. स्थानीय स्तर पर उन्हें जमीनी नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन में काम किया है. राज्यसभा के लिए नामांकन प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी की जाएगी. इसके बाद औपचारिक चुनावी प्रक्रिया होगी. लक्ष्मी वर्मा के सामने अब प्रदेश के मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने की चुनौती होगी. छत्तीसगढ़ के विकास, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण ढांचे और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर उनसे सक्रिय भूमिका की उम्मीद की जा रही है.

See also  जांजगीर-नैला में रेल ओव्हर ब्रिज निर्माण व ट्रेनों के ठहराव सहित अन्य मांगों को लेकर 06 मार्च को नगर बंद एवं चक्काजाम की चेतावनी

जमीनी कार्यकर्ता से राष्ट्रीय मंच तक

लक्ष्मी वर्मा का सफर एक साधारण कार्यकर्ता से राज्यसभा उम्मीदवार बनने तक का है. तीन दशक की सक्रिय राजनीति, संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक भागीदारी और निर्वाचित पदों का अनुभव उनके राजनीतिक जीवन की बड़ी पूंजी है. भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए यह स्पष्ट किया है कि पार्टी जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को अवसर देने की नीति पर कायम है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि वे राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की आवाज किस तरह बुलंद करती हैं और प्रदेश के मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श में किस तरह स्थान दिलाती हैं. छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह फैसला आने वाले समय में कई नए समीकरणों को जन्म दे सकता है. फिलहाल, संगठन से संसद तक पहुंचने की उनकी यह यात्रा प्रदेश की सियासत में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुकी है.

लक्ष्मी वर्मा को मिल रही बधाइयां

राज्यसभा के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद लक्ष्मी वर्मा को लगातार बधाइयां मिल रही हैं. इसी क्रम में मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोदस राम कश्यप ने समाज की ओर से उन्हें शुभकामनाएं दी हैं. केंद्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यह पूरे समाज के लिए गर्व का क्षण है. लक्ष्मी वर्मा ने वर्षों तक संगठन, समाज और जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है. उनका राज्यसभा के लिए चयन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि समाज की मेहनत और भागीदारी की भी पहचान है. उन्होंने विश्वास जताया कि लक्ष्मी वर्मा संसद के उच्च सदन में प्रदेश और समाज की आवाज को मजबूती से उठाएंगी.

Related Articles

Leave a Reply