रायपुर सेंट्रल जेल में बंद छात्र ने दिया NEET-UG री-एग्जाम, हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष सुरक्षा में पहुंचा परीक्षा केंद्र

रायपुर: कहते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सपनों को पूरी तरह कैद नहीं किया जा सकता. रायपुर में आज ऐसा ही एक अनोखा और भावुक दृश्य देखने को मिला, जब सेंट्रल जेल में बंद एक छात्र को डॉक्टर बनने के अपने सपने की परीक्षा देने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा केंद्र लाया गया. यह सिर्फ एक छात्र की परीक्षा नहीं थी, बल्कि न्याय, शिक्षा और भविष्य के अधिकार के बीच संतुलन की एक मिसाल भी थी.
रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध छात्र कुणाल तरुणकर आज NEET-UG 2026 री-एग्जाम में शामिल हुआ. हाईकोर्ट के विशेष निर्देशों के बाद उसे सुरक्षा घेरे में डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया गया. जेल से निकलते वक्त उसके साथ पुलिस और जेल प्रशासन की विशेष टीम मौजूद रही. एएसआई, हवालदार और सिपाहियों की टीम ने उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और वापस जेल लाने की जिम्मेदारी संभाली.
कुणाल तरुणकर रायपुर के शिवानंद नगर का निवासी है. उस पर एक युवती को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है.जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2026 में 20 वर्षीय युवती ने आत्महत्या कर ली थी. जांच के दौरान मिले कथित सुसाइड नोट और मोबाइल फोन के साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कुणाल को आरोपी बनाया गया. उस पर युवती को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और दबाव बनाने के आरोप लगाए गए, जिसके बाद उसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया. मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है और आरोपों पर अंतिम फैसला आना बाकी है.
री-NEET परीक्षा नजदीक आने पर छात्र की ओर से अधिवक्ता अनुकूल विश्वास ने हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया.मामले की अर्जेंट सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की पीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया. अदालत ने माना कि न्यायिक हिरासत में होने के बावजूद छात्र को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए.कोर्ट ने रायपुर पुलिस अधीक्षक और जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि छात्र को निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाने तथा परीक्षा में शामिल कराने की पूरी व्यवस्था की जाए.
यह मामला केवल एक आरोपी छात्र का नहीं है. यह उस बड़े सवाल को भी सामने लाता है कि क्या किसी व्यक्ति का शैक्षणिक भविष्य तब तक पूरी तरह समाप्त मान लिया जाना चाहिए, जब तक अदालत अंतिम निर्णय न दे दे? हाईकोर्ट के आदेश ने यह संदेश दिया कि न्यायिक प्रक्रिया और शिक्षा का अधिकार दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं. दोषी या निर्दोष होने का फैसला अदालत करेगी, लेकिन भविष्य की संभावनाओं का दरवाजा समय से पहले बंद नहीं किया जाना चाहिए.
जब विशेष सुरक्षा के बीच छात्र परीक्षा केंद्र पहुंचा तो यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया. सामान्य अभ्यर्थियों के बीच एक ऐसा परीक्षार्थी मौजूद था, जो सीधे जेल से परीक्षा देने आया था. यह घटना NEET-UG 2026 री-एग्जाम के सबसे चर्चित घटनाक्रमों में शामिल हो गई है.
कभी-कभी जिंदगी ऐसे मोड़ पर खड़ी कर देती है जहां एक तरफ आरोपों का बोझ होता है और दूसरी तरफ सपनों का भार. रायपुर में आज दोनों आमने-सामने थे. अदालत ने कानून की सीमाओं के भीतर रहकर एक छात्र को अपने भविष्य के लिए संघर्ष करने का अवसर दिया. अब परीक्षा का परिणाम क्या होगा और न्यायालय का अंतिम फैसला क्या होगा, यह भविष्य बताएगा. लेकिन इतना जरूर है कि आज सलाखों के पीछे बंद एक युवक ने यह महसूस किया होगा कि सपनों की परीक्षा देने का अधिकार अभी भी उसके पास है.




