छत्तीसगढ़

वायरल इंफेक्शन इस बार कोरोना जैसा: चेस्ट और गले में कर रहा अटैक, ठीक होने में लग रहा काफी वक्त

रायपुर। बदलते मौसम में सक्रिय होने वाले इंफ्लुएंजा श्रेणी के वायरल इंफेक्शन ने इस बार कोरोना जैसा रूप धरा है। यह मौसमी वायरस चेस्ट और गले में इंफेक्शन के रूप में अटैक कर रहा है। संक्रमण थोड़ा ताकतवर भी है, जिसकी वजह से पीड़ितों को पूरी तरह ठीक होने में दस से पंद्रह दिन का वक्त भी लग रहा है। सरकारी अस्पतालों के मेडिसिन विभाग में पहुंचने वाले दस में चार मरीज इसी से पीड़ित हैं। चिकित्सकों के मुताबिक लक्षण के आधार पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

मौसम के बदलाव के दौरान लोगों को बीमार करने वाला वायरस के म्यूटेशन में हर बार बदलाव होता है। इस बार यह थोड़ा-थोड़ा कोरोना जैसे लक्षण के साथ अटैक कर रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक वायरस इस बार लोगों के चेस्ट में कफ और गले में खुजली जैसी समस्या से पीड़ित कर रहा है और मौसमी बीमारी से पीड़ित होने वाले लगभग 90 प्रतिशत लोगों को यह प्राब्लम हो रही है। इसके अलावा जुकाम और बुखार जैसी समस्या भी हो रही है।

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आमतौर पर इंफेक्शन बदलते मौसम में अपना असर दिखाता है और कुछ समय पर समाप्त हो जाता है। इस बार इंफेक्शन का दौर कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है और अस्पतालों से मौसमी बीमारी वाले मरीजों की भीड़ खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आंबेडकर अस्पताल, जिला अस्पताल के मेडिसिन विभाग में आने वाले ज्यादातर मरीज मौसमी बीमारी से पीड़ित हैं। इनमें कई पेशेंट ऐसे भी हैं जिनकी समस्या 15 से 20 दिन बाद भी ठीक नहीं हो रही हैं।

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मौसम में बदलाव होने के बाद कफ सिरप की दवा बाजार में डिमांड पिछले महीनेभर से बढ़ी हुई है। नकली कफ सिरप का मामला सामने आने के बाद इसके उपयोग काफी दिनों तक प्रभावित रहा। इसके बाद विभागीय कार्रवाई और नामी कंपनियों द्वारा बरती जा रही सावधानी के बाद बच्चों को छोड़कर बड़े लोगों के लिए कफ सिरप का उपयोग प्रारंभ हुआ। सामान्य दिनों की तुलना में राज्य कफ सिरप की डिमांड में दस करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।

चिकित्सकों के अनुसार आमतौर पर मौसमी बीमारी छोटे बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है। इस बार मौसमी बीमारी की समस्या से हर वर्ग के लोग पीड़ित है। वायरल इंफेक्शन की समस्या को ध्यान में रखते हुए खानपान में थोड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इसके अलावा अधिक उम्र और दूसरी तरह के गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को ऐसे दौर ज्यादा सजग रहने की जरूरत है।

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चिकित्सकों के मुताबिक

महामारी रोकथाम एवं वरिष्ठ पूर्व नियंत्रक डॉ.सुभाष मिश्रा ने बताया कि, वायरल इंफेक्शन इंफ्लुएंजा श्रेणी के होते है, समय-समय पर इसका म्यूटेशन होता है। अभी मौसमी बीमारी की शिकायतें बढ़ी हुई है। बीमारी के लक्षण के आधार पर इसका इलाज किया जा रहा है। बचाव के लिए थोड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

आंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग विशेषज्ञ डॉ. आरके पटेल ने बताया कि, चिकित्सक मौसमी बीमारी इस बार कुछ लंबा खिंच रही है, ओपीडी में काफी संख्या में पीड़ित पहुंच रहे हैं। गले और चेस्ट में इंफेक्शन के साथ खांसी-बुखार जैसी समस्या हो रही है। लक्षण के आधार पर उन्हें दवा दी जा रही है।

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