छत्तीसगढ़

डोंगरगढ़ में फिर डिरेल हुई रोपवे की ट्रॉली, डेढ़ महीने पहले हुए हादसे से नहीं लिया सबक

डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर रोपवे की ट्राली एक बार फिर डिरेल होकर एक ओर झुक गई. गनीमत रही कि ट्रॉली में कोई सवार नहीं था, वरना यह घटना किसी बड़ी अनहोनी में बदल सकती थी. चौंकाने वाली बात ये है कि ये वही जगह है जहां करीब डेढ़ महीने पहले वीआईपी नेताओं से भरी ट्रॉली पलट गई थी, तब बीजेपी प्रदेश महामंत्री भरत वर्मा, पूर्व मंत्री रामसेवक पैकरा और मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष मनोज अग्रवाल घायल हुए थे. उस समय प्रशासन और ट्रस्ट ने जांच और सुधार के वादे किए थे. रोपवे कुछ दिन बंद रहा, खानापूर्ति हुई, और फिर ‘सुधार’ का सर्टिफिकेट लेकर संचालन शुरू कर दिया गया. अब एक बार फिर वही लापरवाही सामने आई है.

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सूत्रों की मानें तो बिना पूरी जांच और ऑटोमैटिक सेफ्टी सिस्टम इंस्टॉल किए रोपवे को सिर्फ मैनुअल मोड में चलाया जा रहा है. यही वजह है कि अब फिर वही खामी सामने आ गई ट्रॉली डिरेल हुई, और सवाल फिर वहीं खड़ा हो गया.

मंदिर ट्रस्ट ने घटना से साफ इनकार किया था. लेकिन जब वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो सभी की जुबान बंद हो गई. फिर वही पुराना खेल शुरू हुआ कंपनी पर आरोप, तकनीकी खामियों के बहाने, बिजली विभाग को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश, और ट्रस्ट खुद को निर्दोष साबित करने में जुट गया.

फ़िलहाल, इस पूरे मामले पर माँ बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति डोंगरगढ़ ने फिर से चुप्पी साध ली है लेकिन डोंगरगढ़ एसडीएम मनोज मरकाम ने बताया कि ट्रस्ट के अध्यक्ष द्वारा जानकारी दी गई है कि रोपवे के एक डिब्बे के डिरेल होने की घटना घटी है. हालांकि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई हैं, क्योंकि रोपवे उस समय खाली था. यह घटना रोपवे के नीचे उतरने के दौरान हुई.

पूर्व की एक घटना में एनआईटी द्वारा जांच की गई थी, जिसमें यह सुझाव दिया गया था कि इस रोपवे को मैन्युअल मोड में भी संचालित किया जा सकता है. एनआईटी की सिफारिश के आधार पर ट्रस्ट और कंपनी द्वारा रोपवे को मैन्युअल रूप से चलाया जा रहा था. घटना के बाद रोपवे संचालन को फिलहाल बंद कर दिया गया है और सुरक्षा की दृष्टि से पुनः जांच की जाएगी. जांच के उपरांत सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए ही रोपवे को दोबारा प्रारंभ किया जाएगा.

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