
रायपुर। प्रदेश में देशी एवं चीप रेंज की शराब प्लास्टिक बोतल में बिक्री होना है। यह नियम एक अप्रैल से लागू हो गया है, लेकिन जब से यह नियम लागू हुआ है, तब से शराब दुकानों में देशी (पौवा) और चीप रेंज की शराब के स्टॉक की कमी आ गई है, जिससे शासन को जहां राजस्व के रूप में हर दिन करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।
गरीबों को भी पीनी पड़ रही महंगी शराब
वहीं गरीब तबके के लोगों को शराब दुकानों में देशी शराब भी नहीं मिल पा रही। इसके कारण लोग देशी शराब की जगह मजबूरी में महंगी अंग्रेजी शराब लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इधर स्टॉक की कमी के कारण कई देशी दुकानें एक-दो घंटे खुली रखने के बाद बंद की जा रही हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि, आगामी सप्ताहभर में व्यवस्था सुधर जाएगी तथा दुकानों में खपत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में स्टॉक पहुंचने लगेगा।
अहातों पर पड़ा असर कमाई आधी हुई
शराब दुकानों में देशी शराब की सप्लाई कम होने का असर अहातों पर भी पड़ रहा है। अहाता में ज्यादातर गरीब एवं मजदूर वर्ग के लोग ही शराब पीने पहुंचते हैं, जो देशी प्लेन, मसाला शराब खरीदते हैं। कई लोग चीप रेंज में गोवा सहित अन्य अंग्रेजी शराब भी खरीदते हैं। दुकानों में इस रेंज की शराब नहीं मिलने के कारण अहातों में लगने वाली भीड़ भी आधी हो गई है, जिससे उनकी कमाई भी आधी हो गई है।
नया सेटअप पूरा तैयार नहीं
विभागीय सूत्रों से पता चला है कि कंपनियों को कांच की जगह प्लास्टिक बोतल शराब भेजने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद कंपनियां नया सेटअप लगा रही हैं। अभी तक कोई भी कंपनी पूरा सेटअप लगा नहीं पाई है। यही कारण है कि प्लास्टिक बोतल शराब की सप्लाई भी बहुत कम है।
नए सेटअप के कारण कंपनियां नहीं कर पा रहीं आपूर्ति
प्रदेश में देशी प्लेन एवं मसाला शराब के निर्माण एवं बोतल भराई कर आपूर्ति के लिए चार कंपनियों से विभाग ने अनुबंध किया है। इसमें मेसर्स रायपुर बॉटलिंग कंपनी बहनाकाडी, मेसर्स क्राउन डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड सिलतरा, मेसर्स सर्वेश्वरी बॉटलिंग एंड बेवरेज एवं मेसर्स कान्टीनेंटल डिस्टलरीज कंपनी शामिल है।
20 से 25 प्रतिशत स्टॉक ही उपलब्ध करा पा रही कंपनियां
इन चारों कंपनियों के साथ चीप रेंज की शराब की आपूर्ति के लिए जिन कंपनियों से अनुबंध किया गया है, इन सभी को 31 मार्च तक प्लास्टिक बोतल में मांग के अनुसार शराब की आपूर्ति करने कहा गया था, लेकिन इनमें देशी शराब से जुड़ी कंपनियां अभी तक प्रतिदिन मांग एवं खपत के अनुसार प्लास्टिक बोतल शराब (पौवा) में लगभग 20 से 25 प्रतिशत स्टॉक ही उपलब्ध करा पा रही हैं। इसके कारण शराब दुकानों में भी 70 से 75 प्रतिशत लोगों को देशी शराब मिल नहीं पा रही है। मजबूरी में उन्हें चीप रेंज की अंग्रेजी शराब लेनी पड़ रही है।
कांच बोतल शराब बेचने 31 मई तक छूट
शराब दुकानों में प्लास्टिक बोतल देशी शराब (पौवा) के स्टॉक की कमी को देखते हुए शासन स्तर पर कंपनियों को 31 मई तक पुराना स्टॉक कांच बोतल (पौवा) की सप्लाई की छूट दी गई है। इस तरह आगामी महीने में भी शराब दुकानों में प्लास्टिक और कांच बोतल में (पौवा) शराब मिलेगी। हालांकि कांच बोतल (पौवा) की आपूर्ति में भी अभी 3 से 4 दिन का समय लग सकता है, क्योंकि छूट मिलने के बाद कंपनियों ने तैयार रखे कांच (पौवा) बोतल में शराब भराई का कार्य शुरू कर दिया है, जो चालू सप्ताह के भीतर दुकानों तक पहुंच जाएगी।
खपत के अनुसार सप्लाई
आबकारी विभाग के जिला अधिकारी राजेश शर्मा ने बताया कि, खपत के अनुसार स्टॉक आ नहीं रहा है, इसलिए कंपनियों को 31 मई तक प्लास्टिक के साथ कांच बोतल शराब की सप्लाई करने की छूट दी गई है। आगामी कुछ दिनों में खपत के अनुसार सप्लाई शुरू हो जाएगी। मई के बाद खपत के अनुसार प्लास्टिक बोतल शराब की सप्लाई होगी, जिससे दुकानों में पर्याप्त मात्रा में स्टॉक उपलब्ध रहेगा।




