कोरबाछत्तीसगढ़

भारी बरसात और अधूरी योजनाओं ने खोली निगम के ड्रेनेज सिस्टम की पोल, कहीं घरों तक घुसा पानी तो कहीं गाड़ियां दबी

कोरबा: तेज बारिश ने कोरबा नगर पालिक निगम के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है. प्री मानसून की तैयारी के दावे धरे के धरे रह गए और पॉश इलाकों तक पानी प्रवेश कर गया. दादर नाले के ऊपर से एक बोलेरो के बहने की तस्वीर सामने आई, तो सिटी के बीच मौजूद कई घरों में पानी भर गया. लोग घरों से पानी बाहर निकलते हुए दिखाई दिए.

सर्वमंगला कनबेरी मार्ग पर पुनर्वास ग्राम जटराज के समीप ओवर बर्डन का मलबा ढहकर सड़क पर बिखर गया. कार इसके नीचे दब गई थी, जिसमें 5 लोग सवार थे. बाल-बाल उनकी जान बची. अब एसईसीएल की ओर से यहां रिटर्निंग वॉल बनाने की बातें कहीं जा रही है, हालांकि इस काम में भी अभी समय लगेगा.

पिछले वर्ष तक भी सीतामणी जैसे इलाकों में पानी भरने की समस्या थी, लेकिन इस वर्ष हुई अधिक बारिश के कारण लोग ज्यादा परेशान हुए. कई इलाके ऐसे रहे, जहां 3 फीट से भी अधिक पानी भर गया. ड्रेनेज सिस्टम के ध्वस्त होने से लोग खासे नाराज़ हैं.

इस वर्ष हुई अधिक परेशानी से लोगों को पुरानी अधूरी योजनाएं याद आ रही हैं और वह निगम पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते अधूरी परियोजनाओं को पूरा कर लिया जाता तो इन परिस्थितियों को टाला जा सकता था.

दूसरी तरफ निगम प्रशासन की ओर से योजना बनाकर काम करने की बातें कही गयी है. अतिक्रमण को भी इसका कारण बताया गया है. बड़े नालों के ऊपर ही अतिक्रमण कर लिया गया है. जिससे जल निकासी बाधित हुई है. इन स्थानों को भी चिन्हांकित करने की जरूरत है.

निहारिका क्षेत्र के पॉश इलाकों में भी इस वर्ष पानी भर गया. सुभाष चौक से पोड़ीबाहर जाने वाले रास्ते में तीन फीट से भी अधिक पानी भर गया था. यहां बच्चे तैरते हुए नजर आए. नालों के जाम होने से इस समस्या के उत्पन्न होने की जानकारी सामने आई.

स्थानीय निवासी अजय का कहना है कि आसपास के ड्रेनेज सिस्टम की इतनी क्षमता नहीं है कि अत्यधिक पानी को बाहर निकाल सके, नए निर्माण हुए हैं, जिससे मार्ग संकरा हो गया है. नालों की चौड़ाई भी कम है. जिससे कि पानी की निकासी नहीं होती.

सिर्फ पोड़ीबाहर जाने वाले रास्ता ही नहीं रवि शंकर नगर, महाराणा प्रताप नगर में भी लोगों के घरों में पानी घुस गया था. जो बरसात रुकते ही पानी को घर से बाहर निकालते हुए नजर आए.अत्यधिक बारिश से ऐसी परिस्थितियां निर्मित हुई, तो दूसरी ओर नालों की चौड़ाई कम होने के कारण लोगों के घरों में पानी प्रवेश कर गया.

KORBA WATERLOGGING

कोरबा शहर को दादर के इलाके से जोड़ने वाला पुल और इसकी बदहाल व्यवस्था एक बार फिर सामने आ गई. दरअसल शहर और दादर के बीच बना पुल सड़क के लेवल से काफी नीचे है. नाला भी काफी संकरा है, तेज बरसात होने पर पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है.

दादर निवासी नीलाभ का कहना है कि रवि शंकर नगर से दादर के बीच यह पुल पड़ता है, दरअसल बारिश ज्यादा होने की वजह से नाले में पानी बढ़ गया था. जिसके कारण एक स्कॉर्पियो यहां पर डूब गया था. मुख्य कारण है, यह पुल काफी पुराना है और काफी नीचे है. बारिश होने पर वाटर का लेवल इससे ऊपर चला जाता है. जब भी बारिश तेज होती है, तो पानी ऊपर चला जाता है. रोड पूरी तरह से ब्लॉक हो जाता है, आवाजाही बंद हो जाती है.

नीलाभ कहते हैं कि गाड़ियां जब क्रॉस होती है, तो यहां से बहने का खतरा हमेशा बना रहता है. पानी के निकासी की काफी दिक्कत है. पुल की ऊंचाई अगर ज्यादा होती है, तो समस्या नहीं होती. पुल को ऊपर करने की जरूरत है. पुल रोड के ऊपर से बनाया जाना चाहिए और यह समस्या काफी सालों से बनी हुई है, सभी को मालूम है कि पुल नीचे है, पानी भर जाता है. रोड भी काफी जर्जर है. लेकिन कोई काम नहीं किया गया और लगातार खतरा बना हुआ है. जब भी पानी भरता है तो जोखिम जैसे स्थिति निर्मित हो जाती है. नया पुल यहां सालों से प्रस्तावित है, लेकिन इसे बनाया नहीं जा रहा है. यह बेहद जरूरी है, वर्ना हर साल की समस्या बनी रहेगी.

इस वर्ष बरसात में शहर के मानिकपुर के इलाके में भी पानी ने अपना रौद्र रूप दिखाया. पार्षद नारायण लाल कुर्रे ने इसकी शिकायत कलेक्टर से भी की है. जिनका कहना है कि मानिकपुर में सागौन बाड़ी, डिपरापारा के इलाके पूरी तरह से डूब गए थे इसका मुख्य कारण है मानिकपुर से एक जो पल गुजरता है और जो एक प्रमुख नाल है. वहां से लगभग 10 वार्डो का पानी ड्रेन होता है. इंडस्ट्रियल एरिया, झगरहा, कोसाबाड़ी, राजेंद्र प्रसाद नगर फेज 1 फेस 2, महाराणा प्रताप नगर, शिवाजी इन सभी इलाकों से जो पानी आता है, वह मानिकपुर के नाले से ही बहकर हसदेव नदी तक जाता है.

हर साल यहां जल भराव की समस्या रहती है, प्रशासन ने इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया. अधिकारी सिर्फ योजना बनाते रह जाते हैं और यह योजना ठंडे बस्ती में चली जाती है. हर बार यह समस्या बनी रहती है, लेकिन शासन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, नालों की चौड़ाई बढ़ाने की जरूरत है.

KORBA WATERLOGGING

सीतामणी में ऐतिहासिक सीता गुफा मंदिर में भी पानी भर गया था. लगभग 100 से अधिक घरों में यहां भी जल भराव की समस्या आई. स्थानीय निवासी दुकालू श्रीवास का कहना है कि यह सीधे तौर पर नगर निगम की लापरवाही है. जब हम लोग पार्षद हुआ करते हैं तो मेरे कार्यकाल में नाला बन रहा था, अधिकरियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया था. यहां से जो यह बड़ा नाला गुजरता है, उसमें बुधवारी से पानी आता है, ट्रांसपोर्ट नगर से आता है. सारे शहर का पानी इसी नाले से आता है और लगभग प्रत्येक वर्ष आसपास के मोहल्ले के डूबने के समस्या बनी रहती है, जब इस नाले का निर्माण हो रहा था, तब मैंने बताया था कि नाले से ज्यादा पानी आता है, लेकिन तब भी नाले का जो मेजरमेंट बनाया गया, वह गलत बनाया गया.

Korba Drainage System

दुकालू श्रीवास कहते हैं कि नाले की गहराई 5 फीट थी, लेकिन उसे फिर 3 फीट ऊपर उठा दिया गया. गहराई कम हो गई और जल निकासी की मात्रा कम हो गई. बाद में भी मैंने इसकी शिकायत की, कुछ अधिकारियों को बोला तो खानापूर्ति कर कुछ प्रयास किया गया. लेकिन वह सफल नहीं हुआ. समस्या जस की पास बनी हुई है. आज यह नाल हमारे लिए समस्या बना हुआ है और यह सिर्फ सीतामणी की समस्या नहीं है. पूरे कोरबा के लिए बड़ी समस्या है.

कोरबा के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल का कहना है कि मैं 15 साल तक शहर का विधायक रहा और नगर पालिक निगम कोरबा में 10 साल तक कांग्रेस के सत्ता रही. जब हमारी सत्ता थी, तब हम प्रत्येक वर्ष बरसात के पहले जर्जर सड़कों की मरम्मत करवाते थे और बड़े नालों की सफाई करवाते थे. लेकिन इस वर्ष खास तौर पर 29 अगस्त को मैंने जो दुर्दशा शहर की देखी, वह आज तक कभी नहीं हुई है. बड़े नालों की सफाई नहीं करवाई जा रही है. प्री मानसून की तैयारी नहीं करवाई जाती, कुछ बड़ी योजनाएं अधूरी हैं. जिन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है, कई बड़े नालों का निर्माण हमारे कार्यकाल में हुआ था. वर्तमान में कि कोई भी नया काम नहीं हो रहा है. इनके पास ना कोई प्लानिंग है, ना कोई विजन है. जिसका खामियाजा लोग भुगत रहे हैं.

Korba Drainage System

शहर के ड्रेनेज सिस्टम के ध्वस्त होने और लोगों की परेशानी के विषय में महापौर संजू देवी राजपूत का कहना है कि इस वर्ष अत्यधिक बारिश हुई है. जिसके कारण लोगों के घरों तक पानी गया है, अत्यधिक बारिश की वजह से ही ऐसी परिस्थितियों निर्मित हुई है. जहां जैसी जरूरत है, उसका आकलन हम कर रहे हैं. प्लानिंग बनाकर ठोस काम किया जाएगा. जिससे कि शहर के ड्रेनेज सिस्टम को अधिक दुरुस्त किया जा सके.

कोरबा जिले में एक जून से अब तक(31 अगस्त) कुल 995.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गयी है. अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार इस अवधि में जिले की तहसील अजगरबहार में 879.1, कोरबा 1337.9 मिलीमीटर, भैंसमा, 1106.2, करतला 1097.6, बरपाली 876.8, कटघोरा 971.2, दीपका 1075.4, दर्री 1081.9, पाली 972.3, हरदीबाजार 743.8, पोंड़ीउपरोड़ा 971, और पसान तहसील में 830.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है. वहीं पिछले 24 घंटे में जिले में 4.1 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है. इसी अवधि में पिछले वर्ष दर्ज की गई औसत आंकड़ों से यह काफी अधिक है.

नगर पालिक निगम कोरबा में कुल 42 छोटे-बड़े नाले हैं, जिनमें से 19 मुख्य बड़े नाले शहर के ड्रेनेज सिस्टम का मुख्य आधार हैं. हसदेव नदी में मिलने वाले 11 प्रदूषित नालों के ट्रीटमेंट (शोधन) के लिए एनटीपीसी (NTPC) के साथ 111 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना पर काम शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य गंदे पानी को रीसाइकिल करना है. योजना 111 करोड़ रुपए की है, जिस पर काम अभी चल रहा है. यह 2027 तक पूरी होगी.

एनटीपीसी (NTPC) के सहयोग से लगभग 111 करोड़ रुपये के फंड से इन बड़े नालों के लिए सेकेंडरी और टर्शरी वाटर ट्रीटमेंट फैसिलिटी तैयार की जा रही है. इसके तहत गंदे पानी को साफ कर रीसायकल करने की योजना है, ताकि उस पानी का उपयोग औद्योगिक कार्यों और कूलिंग के लिए किया जा सके.

शहर में बड़े नालों की कुल लंबाई 19 किलोमीटर है. परिवहन नगर, कोसाबाड़ी, पं. रविशंकर शुक्ला, बालको, दर्री, बांकीमोंगरा और सर्वमंगला नगर. निगम के 67 में से 43 वार्ड की सफाई व्यवस्था ठेके पर है. जिसकी लागत लगभग 10 करोड़ रुपये आती है. 14 वार्ड में निगम अपने कर्मचारियों से सफाई करवाता हैं. यहां सफाई का जिम्मा पूरी तरह से निगम के कंधों पर है. वहीं 10 वार्ड NTPC, SECL, CSEB जैसे औद्योगिक उपक्रमों के प्रभाव वाले क्षेत्र है.

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