जांजगीर में धान खरीदी से पहले बड़ा संकट: डिजिटल क्रॉप सर्वे और पीवी ऐप के पचड़े में फंसे 3.61 लाख खसरे

जांजगीर-चांपा : खेतों में अर्ली वैरायटी धान की फसल तैयार होने लगी है, लेकिन किसानों के सामने इस बार फसल बेचने से पहले ही नई परेशानी खड़ी हो गई है। शासन ने धान खरीदी के लिए डिजिटल क्राप सर्वे (डीसीएस) अनिवार्य कर दिया है। जिस खसरे का डीसीएस होगा, उसी खसरे की उपज किसान खरीदी केंद्र में बेच सकेगा।
समस्या यह है कि जिले के 12.06 लाख वास्तविक खसरों में से डीसीएस के लिए शासन स्तर से सिर्फ 6.08 लाख खसरे ही उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें विभाग 5.75 लाख खसरों का सर्वे पूरा होने का दावा कर रहा है। दूसरी ओर फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए पीवी ऐप में 2.35 लाख खसरे उपलब्ध हैं। दोनों को मिलाने के बाद भी 3,61,749 खसरे ऐसे हैं, जो न डीसीएस में हैं और न पीवी ऐप में। ऐसे में इन खसरों से जुड़े किसानों का धान कैसे खरीदा जाएगा, यह बड़ा सवाल बन गया है।
इधर डीसीएस की प्रक्रिया को लेकर पटवारियों की परेशानी भी बढ़ गई है। शासन के निर्देश के अनुसार पटवारी को मौके पर जाकर प्रत्येक खसरे की फसल का फोटो लेकर डीसीएस ऐप में अपलोड करना है। इसके बाद सर्वर से वेरिफिकेशन और फिर पटवारी स्तर से अप्रूवल की प्रक्रिया पूरी करनी है। इसके अलावा जिन खसरों को पीवी ऐप में दिया गया है, उनका भौतिक सत्यापन भी करना है। पटवारी संघ का कहना है कि एक ही कार्य के लिए दोहरी प्रक्रिया से मैदानी अमले पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
इसी के विरोध में पटवारियों ने पीवी ऐप के माध्यम से किए जाने वाले फिजिकल वेरिफिकेशन का बहिष्कार कर दिया है। इसका असर डीसीएस के काम पर भी पड़ा है और जिले में करीब पखवाड़ेभर से सर्वे का काम ठप पड़ा है। बताया जा रहा है कि समस्या केवल जांजगीर-चांपा जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश स्तर पर पटवारी संघ इसका विरोध कर रहा है।
डीसीएस की धीमी प्रगति को देखते हुए करीब पखवाड़ेभर पहले कमिश्नर और कलेक्टर ने खेतों का दौरा कर सर्वे का काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए थे। विभाग 6.08 लाख उपलब्ध खसरों में से 5,75,848 का सर्वे पूरा कर करीब 96 प्रतिशत काम होने का दावा कर रहा है। लेकिन उपलब्ध आंकड़े ही बताते हैं कि वास्तविक खसरों की तुलना में बड़ी संख्या में खसरे अभी सिस्टम में उपलब्ध नहीं हैं।
3.61 लाख किसानों के सामने सवाल
जिले में कुल 12,67,256 खसरे दर्ज हैं। इनमें 61,255 शून्य रकबा वाले खसरे हैं। इन्हें अलग करने पर 12,06,001 वास्तविक खसरे बचते हैं। डीसीएस में 6,08,572 और पीवी ऐप में 2,35,680 खसरे उपलब्ध हैं। दोनों को मिलाने पर 8,44,252 खसरे ही कवर होते हैं। इस हिसाब से 3,61,749 खसरे अब भी दोनों व्यवस्थाओं से बाहर हैं। यदि शासन की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव नहीं हुआ तो इन खसरों के किसानों के सामने धान बेचने को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है।
पटवारी संघ ने शासन से पहल की मांग
पटवारी संघ जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र यादव ने कहा कि डिजिटल क्राप सर्वे में आधे से अधिक खसरे उपलब्ध नहीं हैं। इनके लिए पीवी ऐप के माध्यम से फिजिकल वेरिफिकेशन कर जानकारी अपलोड करने की व्यवस्था की गई है, जिसका पटवारी संघ विरोध कर रहा है। प्रदेश स्तर पर इसका बहिष्कार किया जा रहा है। डीसीएस नहीं होने वाले खसरों में धान खरीदी प्रभावित होने की आशंका है, इसलिए शासन स्तर पर तत्काल पहल कर समाधान किया जाना चाहिए।
फैक्ट फाइल
- कुल खसरे : 12,67,256
- शून्य रकबा वाले खसरे : 61,255
- वास्तविक खसरे : 12,06,001
- डीसीएस के लिए उपलब्ध खसरे : 6,08,572
- डीसीएस सर्वे पूरा : 5,75,848
- पीवी ऐप में खसरे : 2,35,680
- डीसीएस व पीवी ऐप से कुल कवर : 8,44,252
- दोनों से बाहर खसरे : 3,61,749
पीवीएप में यह है समस्या
- 1. डेटा में भिन्नता : ग्राउंड स्तर पर नियुक्त सर्वेयरों द्वारा की गई लापरवाही के कारण वास्तविक गिरदावरी रिकार्ड और डिजिटल क्राप सर्वे के आंकड़ों में अंतर आ जाता है।
- 2. जियो-फेंसिंग और मैप की त्रुटियां: कई बार खेतों के डिजिटल नक्शे सटीक न होने के कारण ऐप में 20 मीटर के दायरे में खेत का प्लाट आनलाइन नहीं खुल पाता, जिससे सर्वेयर फोटो अपलोड नहीं कर पाते हैं।
- 3. पोर्टल पर पंजीयन छूट जाना : एग्री स्टैक या सरकारी पोर्टल पर कई किसानों का आधार या भूमि रिकार्ड लिंक न होने से उनका डिजिटल पंजीयन अधूरा रह जाता है।
- 4. सर्वे की धीमी गति : तकनीकी खराबी, खराब नेटवर्क और ऐप सर्वर डाउन होने की वजह से तय समय सीमा के भीतर काम पूरा करने में रुकावट आती है।
समस्याओं का निदान
- पीवी एप से शत-प्रतिशत मिलान: यदि प्राथमिक सर्वे में त्रुटि है, तो पटवारी और उच्च अधिकारियों द्वारा पीवी एप के माध्यम से मौके पर जाकर सत्यापन किया जाता है। किसी भी प्रकार के अंतर को मैन्युअल जांच के बाद पीवी एप में सही कर दिया जाता है, जिससे किसानों को धान या अन्य फसल बेचने और बीमा क्लेम में नुकसान न हो।
बफर जोन में सुधार: तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए नक्शों को सुधारा जा रहा है और ऐप में जीपीएस लोकेशन की सटीकता को बेहतर बनाया जा रहा है ताकि छोटे खेतों का सर्वे भी आसानी से हो सके।शिविर लगाकर एग्री स्टैक पंजीयन: छूटे हुए किसानों के लिए ग्राम स्तर पर विशेष कैंप लगाकर उनका पंजीयन पूरा किया जाता है ताकि कोई भी पात्र किसान सरकारी लाभों से वंचित न रहे।समय-सीमा में वृद्धि: सरकार द्वारा तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए अक्सर सत्यापन और डेटा एंट्री की अंतिम तारीख को बढ़ा दिए जाने पर सभी विसंगतियों का पूरी तरह निदान किया जा सके।



