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छत्तीसगढ़ के शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी: स्कूलों को बनाया जाएगा स्मार्ट, 33 हजार पदों पर शुरू होगी प्रक्रिया

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छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बुधवार को समीक्षा बैठक ली है. इसमें शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. साथ ही कई तरह के कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में शिक्षकों की भर्ती, वेतन विसंगति, पदोन्नति, नई शालाओं के निर्माण सहित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर जानकारी ली गई.

33 हजार शिक्षकों की होगी भर्ती: बैठक के दौरान मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, “छत्तीसगढ़ में शिक्षा के स्तर को विश्व स्तरीय बनाने के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं. राज्य में शिक्षकों के 33 हजार रिक्त पदों पर मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से स्वीकृति के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी. इसके साथ ही राज्य में वेतन विसंगति और संयुक्त संचालक, उप संचालक, प्राचार्य, व्याख्याता, उच्च वर्ग शिक्षक, प्रधानपाठक की पदोन्नति के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया. इन सारी विसंगतियों को जल्द से जल्द दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है.”

स्कूल भवनों का होगा निर्माण: मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सभी शासकीय और गैर शासकीय स्कूलों में निःशुल्क पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराने के लिए पाठ्य पुस्तक निगम को निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि, “पुस्तकों को जिला स्तर पर उपलब्ध कराया जाएगा. वहां से सभी स्कूलों में शिक्षा सत्र प्रारंभ होने से पहले ही भेज दिया जाएगा. प्रदेश के जर्जर होते स्कूलों की बिल्डिंग और नए भवनों के निर्माण के लिए डीएमएफ और सीएसआर मद से काम कराने का निर्देश जारी किया गया. निर्माण कार्यों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से अलग से इंजीनियरिंग सेल के निर्माण प्रक्रिया को जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा. इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है. साथ ही विश्व स्तरीय शिक्षा मुहैया कराने के लिए सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और ई-क्लास रूम बनाने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य के ज्यादा से ज्यादा स्कूलों का पीएम श्री योजना के तहत अपग्रेडेशन करने के निर्देश दिए गए हैं.”

सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षा पर दिया जाएगा जोर: शिक्षा मंत्री ने राज्य के समस्त शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में मैथ्स, साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स संकाय शुरू करने के निर्देश दिए. साथ ही अनुदान प्राप्त अशासकीय शालाओं की समय-समय पर जांच करने को कहा. अशासकीय शालाओं में आर.टी.ई. के शुल्क की प्रतिपूर्ति की जानकारी ली. अशासकीय शालाओं में शुल्क वृद्धि, गणवेश, पुस्तक खरीदी और आर.टी.ई के तहत प्रवेश में गड़बड़ी न हो इसके लिए जिला स्तर पर कमेटी गठित करने को कहा. इसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो और नियम विरूद्ध काम करने वाले शालाओं के खिलाफ कार्रवाई के भी निर्देश दिए. उन्होंने बेहतर निजी विद्यालयों को अनुदान देकर विद्यार्थियों को इसमें शिक्षा दिलाने पर जोर दिया.

कमजोर स्टूडेंट्स पर होगा फोकस: इसके अलावा शिक्षा मंत्री ने विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक शैक्षणिक सत्र में दो बोर्ड परीक्षाएं आयोजित किए जाने के निर्देश दिए. साथ ही कमजोर बच्चों के लिए जिला स्तर पर कोचिंग केंद्र खोलने की बात कही. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग सेंटर शुरू करने के भी निर्देश दिए. विद्यार्थियों को अंग्रेजी भाषा का सही ज्ञान देने के लिए भाषा एक्सपर्ट की नियुक्ति के साथ ही जिन क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी है, उस कमी को तुरंत पूरा करने के लिए अतिथि शिक्षकों की भर्ती के निर्देश दिए. शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से “अमृतकाल छत्तीसगढ़ विजन @2047“ विजन डॉक्यूमेंट को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए. इसके अलावा न्योता भोज कार्यक्रम की समीक्षा की.

बता दें कि इस समीक्षा बैठक में स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, समग्र शिक्षा प्रबंध संचालक संजीव झा, लोक शिक्षण संचालक दिव्या मिश्रा मौजूद थीं.

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