छत्तीसगढ़

रेप की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए पुलिस ने मांगा मुर्गा! पीड़िता का पति बोला- जमीन गिरवी रख दी रिश्वत

जशपुर : पुलिस पर गंभीर आरोप लगे हैं. कोरवा जनजाति  की एक रेप पीड़िता की एफआईआर लिखने के एवज में मुर्गा और पैसे मांगने का आरोप है.जशपुर के बगीचा थाना क्षेत्र के पंड्रापाठ पुलिस चौकी के प्रभारी व स्टाफ पर रेप पीड़िता के पति ने आरोप लगाए हैं.आदिवासी समुदाय की पीड़िता के पति ने मामले की लिखित शिकायत जशपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में भी की है.

शिकायत में पीड़िता के पति ने कहा है कि उसे अपनी जमीन बंधक रखकर पुलिस वालों की मांग पूरी करनी पड़ी. मामला सामने आने पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. इतना ही नहीं भूपेश बघेल ने मामले में केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी हस्तक्षेप करने की मांग की है.

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ये है मामला 

दरअसल जशपुर के पंड्रापाठ पुलिस चौकी में बीते 2 दिसंबर को 29 साल की महिला अपने पति के साथ पहुंची. महिला का आरोप था कि ईश्वर सोनवानी नाम के युवक ने जंगल में उसके साथ रेप किया है. पुलिस ने बीएनएस की धाराओं के तहत आरोपी के खिलाफ जुर्म दर्ज कर उसे 4 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भी दाखिल करवा दिया.आरोपी की गिरफ्तारी के 4 दिन बाद 6 दिसंबर को पीड़िता का पति पुलिस अधीक्षक कार्यालय जशपुर पहुंचा.पीड़िता के पति ने लिखित शिकायत की. 

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इसके अलावा गांव से ही 600 रुपये का मुर्गा खरीदकर ले गया.उस दिन मुर्गा के अलावा 500 रुपये और नगद पुलिस वालों ने लिया. इसके बाद 5 दिसंबर को बयान दर्ज कराने के लिए जशपुर जाने के लिए किराए की गाड़ी करने कहा गया. मैं चौकी प्रभारी व पत्नी के साथ जशपुर आया लेकिन बयान नहीं हुआ. आज (6 दिसंबर) मैं 3500 रुपये में किराए की गाड़ी कराकर आया हूं. इसके लिए मैंने अपनी जमीन 10000 रुपये में बंधक रखी है, जिसमें से 9 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं.

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बेबुनियाद आरोप लगा रहे

हालांकि जशपुर पुलिस इस आरोप को बेबुनियाद बता रही है.पंड्रापाठ पुलिस चौकी के प्रभारी एमआर साहनी का कहना है कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद हमने कार्रवाई की. 2 दिन की जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा.पीड़ित पक्ष को आपत्ति थी कि धारा 376 क्यों नहीं लगाया गया, हमने बताया कि अब बीएनएस के तहत मामले दर्ज किए जा रहे हैं,जिसमें दुष्कर्म की धारा का नंबर बदल गया है, लेकिन वे असहमत थे. अब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.

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