जांजगीर: कदाचरण के दोषी शिक्षक को राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार चयन के लिए की गयी अनुशंसा की, जांच की मांग

मालखरौदा
शा कन्या उमा विद्यालय अडभार में पदस्थ व्याख्याता श्री ओ पी कैवर्त ने महामहिम राष्ट्रपति , राज्यपाल महोदया माननीय मुख्यमंत्री सहित सभी उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर विगत दिनों जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती श्रीमती मीता मुखर्जी द्वारा बिना अभिलेख जांच किये कदाचरण के दोषी शिक्षक श्री शैल कुमार पाण्डेय जो कुछ ही दिनों पूर्व शा प्राथमिक शाला आश्रम शाला मसनिया कला में प्रधान पाठक के पद पर पदस्थ किये गए हैं उनकी राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार चयन के लिए की गयी अनुशंसा के जांच की मांग किया है.
पत्र में उन्होंने अवगत कराया है कि श्री पाण्डेय जनवरी 2012 से जुलाई 2015 तक 838 कार्य दिवसों में 190 दिन विद्यालय में उपस्थित नहीं रहे हैं इनके विरुद्ध पूर्व में अनेकों शिकायत किया गया है ये अपने पत्नी के नाम से बीमा व्यवसाय करते रहें हैं , फर्जी यात्रा भत्ता देयक प्रस्तुत करते रहे हैं बिना विभागीय अनुमति के इनके द्वारा जमीन क्रय किया गया है तत्कालीन जांच अधिकारी एवं प्राचार्य शा उ मा वि रगजा शै जि सक्ती के जांच प्रतिवेदन दिनांक 04.01.2016 के अनुसार इनके अनेक कार्य दिवसों को गैर शैक्षणिक कार्य माना गया है और इनकी अनाधिकृत अनुपस्थिति के आधार पर कई कार्य दिवसों का नो वर्क नो पे अर्थात कार्य नहीं तो वेतन नहीं की अनुशंसा किया गया है.
तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती ने भी पत्र दिनांक 14.11.2015 जारी करते हुए इनके कई कार्य को अधिकार क्षेत्र से बाहर एवं पदीय कर्तव्य के प्रतिकुल मानते हुए चेतावनी पत्र जारी किया गया था इससे स्पष्ट है कि राष्ट्रपति शिक्षक पुरस्कार चयन के लिए अनुशंसा करना महामहिम के प्रतिष्ठा के अनुकूल नहीं है उन्होंने यह भी अवगत कराया है कि जिले में ऐसे सैकड़ों शिक्षक कार्यरत हैं जिनकी शैक्षणिक उपलब्धि एवं कार्य श्री पाण्डेय से उत्कृष्ट हैं परन्तु इन प्रतिभाशाली शिक्षकों की उपेक्षा कर एक विवादास्पद शिक्षक को चयन के अनुशंसा करना उचित नहीं है । ये वर्ष 2015 में भी तथ्यों को छुपाकर राज्यपाल पुरस्कार पाने में सफल हो गए थे वर्तमान में भी ऐसा ही प्रयास कर रहे हैं पूरे प्रकरण की उन्होंने जांच की मांग किया है