गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, मां बम्लेश्वरी की साधना होती है विशेष फलदायी

डोंगरगढ़। हिंदू धर्म परंपरा में गुप्त नवरात्रि को शक्ति आराधना का अत्यंत महत्वपूर्ण और रहस्यमयी पर्व माना जाता है। माघ मास में पड़ने वाली इस नवरात्रि के साथ ही छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ में आध्यात्मिक वातावरण और अधिक गहन हो गया है। यह नवरात्रि सामान्य चैत्र या शारदीय नवरात्रि की तरह सार्वजनिक उत्सव और भव्य आयोजनों के लिए नहीं, बल्कि अंतर्मुखी साधना, मंत्र जप और आत्मिक शक्ति जागरण के लिए जानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार माघ और आषाढ़ मास में आती है। ‘गुप्त’ शब्द स्वयं इस पर्व की प्रकृति को स्पष्ट करता है, जहां साधक अपनी साधना को गोपनीय रखते हैं और दिखावे से दूर रहकर देवी शक्ति की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस काल में की गई साधना शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ-साथ आत्मबल में वृद्धि करती है।

इस नवरात्रि में देवी दुर्गा के उग्र और सिद्धिदायी स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। साधक मंत्र-जप, ध्यान, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत के माध्यम से शक्ति साधना करते हैं। यह साधना भय, रोग, मानसिक अस्थिरता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। वहीं सामान्य श्रद्धालु भी सरल पूजा और संयमित जीवनचर्या अपनाकर माँ की कृपा प्राप्त करते हैं।
मां बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ जो पूरे देश में आस्था का प्रमुख केंद्र है, गुप्त नवरात्रि के दौरान एक शांत साधना स्थल के रूप में दिखाई देता है। यहां आने वाले श्रद्धालु और साधक भीड़-भाड़ और औपचारिकता से दूर रहकर मां बम्लेश्वरी के चरणों में ध्यान और जप में लीन रहते हैं। मंदिर परिसर में इस दौरान विशेष अनुशासन, स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखा जाता है, ताकि साधना करने वालों को पूर्ण एकाग्रता मिल सके।
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि मां बम्लेश्वरी धाम में गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई साधना विशेष फलदायी होती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस पर्व पर सीमित संख्या में ही सही, लेकिन आस्था से परिपूर्ण श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचकर शक्ति उपासना करते हैं। कुल मिलाकर गुप्त नवरात्रि वह पर्व है जो व्यक्ति को बाहरी आडंबर से दूर ले जाकर आंतरिक शक्ति से जोड़ता है। माँ बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ में यह नवरात्रि श्रद्धा, साधना और आत्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बनकर भक्तों को शक्ति, धैर्य और संतुलन की अनुभूति करा रही है।




