देश

ऐतिहासिक फैसला : मासिक धर्म स्वच्छता मौलिक अधिकार, हर स्कूल में मुफ्त सेनेटरी पैड अनिवार्य,उल्लंघन पर मान्यता खत्म

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने लड़कियों के स्वास्थ्य, गरिमा और शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने वाला एक बड़ा और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने घोषणा की कि मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार और निजता के अधिकार का अभिन्न अंग है। साथ ही, यह अनुच्छेद 21A (मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा) से भी जुड़ा है।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश दिए कि हर स्कूल (सरकारी, निजी, सहायता प्राप्त, शहरी-ग्रामीण) में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त में ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सेनेटरी नैपकिन (उच्च सुरक्षा मानकों वाले, ASTM D-6954 या D-694 अनुपालन वाले) उपलब्ध कराए जाएं।

See also  पुरी के होटल में देर रात बम हमला, दहशत में टूरिस्ट

क्या था मामला?

• याचिका दाखिल करने वाली: सामाजिक कार्यकर्ता जया ठाकुर ने 10 दिसंबर 2024 को जनहित याचिका दायर की थी।
• मांग: केंद्र सरकार की ‘Menstrual Hygiene Policy for School-going Girls’ को पूरे भारत में लागू किया जाए, खासकर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6-12 की लड़कियों के लिए।

समस्या: कई स्कूलों में मासिक धर्म के दौरान पर्याप्त सुविधाएं (पैड, शौचालय, पानी, साबुन) नहीं होने से लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, जिससे उनकी शिक्षा प्रभावित होती है और गरिमा का हनन होता है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

1. मुफ्त सेनेटरी पैड: सभी स्कूलों में लड़कियों को मुफ्त में बायोडिग्रेडेबल पैड उपलब्ध कराए जाएं। इन्हें टॉयलेट में वेंडिंग मशीन या निर्धारित जगह पर आसानी से मिलें।
2. शौचालय सुविधाएं: लड़के-लड़कियों के लिए अलग-अलग, कार्यशील, स्वच्छ और पानी से जुड़े जेंडर-सेग्रिगेटेड टॉयलेट अनिवार्य। दिव्यांगों के अनुकूल (डिसेबल-फ्रेंडली) टॉयलेट भी हों। हैंडवॉश सुविधा में साबुन और पानी हमेशा उपलब्ध।
3. MHM कॉर्नर: हर स्कूल में Menstrual Hygiene Management Corner बनाया जाए, जहां स्पेयर यूनिफॉर्म, इनरवियर, डिस्पोजेबल बैग आदि उपलब्ध हों।
4. जागरूकता और प्रशिक्षण: छात्राओं, शिक्षकों और स्टाफ को मासिक धर्म और स्वच्छता पर जागरूकता और प्रशिक्षण दिया जाए।
5. सख्ती: आदेश का पालन न करने पर निजी स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है। सरकारी स्कूलों में विफलता पर राज्य सरकारें सीधे जवाबदेह होंगी।

See also  मोदी सरकार का बड़ा फैसला: सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' गीत के 6 छंद अनिवार्य

फैसले का महत्व

• अदालत ने कहा: “मासिक धर्म सुविधाओं की कमी से लड़कियों की गरिमा, निजता और शिक्षा का अधिकार प्रभावित होता है। यह उनकी सेक्सुअल और रीप्रोडक्टिव हेल्थ को भी नुकसान पहुंचाता है।”

• यह फैसला लड़कियों की ड्रॉपआउट दर कम करने, लिंग समानता बढ़ाने और स्वास्थ्य सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा।
• केंद्र की मौजूदा नीति को अब पूरे देश में लागू करना अनिवार्य हो गया है।
यह फैसला लड़कियों के लिए एक बड़ी जीत है और शिक्षा व्यवस्था में मासिक धर्म को अब “शर्म” नहीं बल्कि “अधिकार” के रूप में देखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकारों को जल्द ही इस पर अमल शुरू करना होगा।

See also  पुरी के होटल में देर रात बम हमला, दहशत में टूरिस्ट

Related Articles

Leave a Reply