
रायपुर। प्रदेश में बिजली के 65 लाख उपभोक्ता हैं। बिजली के नए टैरिफ के लिए बिजली नियामक आयोग ने मंगलवार से जनसुनाई प्रारंभ की है। पहली बार छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी के क्षेत्रीय दफ्तरों में जनसुनवाई की जा रही है। मंगलवार को दुर्ग, बिलासपुर और राजनांदगांव में हुई जन सुनवाई में महज एक दर्जन उपभोक्ता पहुंचे। सभी ने एक स्वर में बिजली की कीमत न बढाने की मांग रखी। अब बुधवार को तीन और क्षेत्रीय दफ्तरों में जनसुनवाई होगी। इसके बाद 19 और 20 फरवरी को नियामक आयोग रायपुर के दफ्तर में जनसुनवाई होगी।
बिजली नियामक आयोग ने पहली बार पॉवर कंपनी के आधा दर्जन क्षेत्रीय दफ्तरों में भी जनसुनवाई रखी है, ताकि ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता अपने सुझाव दे सकें। पहले दिन सोमवार को सबसे पहले दुर्ग में सुबह को 10.30 से 12 बजे तक जनसुनाई में महज चार उपभोक्ता पहुंचे। इनमें एक बीएसपी के विजय देशमुख के साथ ही तीन अन्य उपभोक्ता राधेश्याम अग्रवाल, मेहरबान सिंह और संतोष साहू शामिल हैं। इन्होंने अपना पक्ष रखते हुए बिजली की कीमत न बढ़ाने की मांग रखी।
बिजली के दाम न बढ़ाने की मांग
बिलासपुर में 12 से 1.30 बजे तक हुई जनसुनवाई में तीन उपभोक्ता हरीश केडिया, संतोष कुमार साव और शरद सक्सेना पहुंचे। इन्होंने एमएसएमई लघु उद्योगों को लेकर पक्ष रखते हुए बिजली की कीमत न बढ़ाने की मांग रखी। अंतिम जनसुनवाई राजनांदगांव में हुई। इसमें छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े लोग पहुंचे। इनमें सुमन सरकार, कमलेश जैन, राजकुमार बत्रा और राजेश जैन शामिल हैं। इन्होंने भी बिजली के दाम न बढ़ाने की मांग रखी। एक विधायक प्रतिनिधि रूपचंद भी पहुंचे।
रायपुर में हंगामाखेज होगी जनसुनवाई
19 फरवरी को नियामक आयोग के दफ्तर रायपुर में 12 से 1.30 तक कृषि एवं कृषि संबंधित कार्य, 2.30 से 4 बजे तक घरेलू 4 से 5.30 बजे तक गैर घरेलू वर्ग के उपभोक्ताओं की जनसुनवाई होगी। 20 फरवरी को 12 से 1.30 तक स्थानीय निकाय, नगर निगम और ट्रेड यूनियन, 2.30 से 4 बजे तक निम्न दाब उद्योग 4 से 5.30 बजे तक समस्त उच्च दाब उपभोक्ताओं की जनसुनवाई होगी।
कांग्रेस बिजली की कीमत बढ़ाने का विरोध कर रही है। ऐसे में आयोग के दफ्तर में होने वाली जनसुनवाई हंगामाखेज होगी। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय भारी संख्या में कांग्रेस के लोगों के साथ आम जनों को लेकर विरोध करने जाएंगे। इसी के साथ हर वर्ग के उपभोक्ता कीमत बढ़ाए जाने का विरोध दर्ज कराएंगे।




