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वेदांता प्लांट में हादसे में बड़ा एक्शन; कंपनी चेयरमैन समेत 8 के खिलाफ FIR, अब तक इतने लोगों की मौत 

सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ भीषण विस्फोट अब एक भयावह त्रासदी में बदल चुका है। हादसे के बाद से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है मिली जानकारी के अनुसार अब तक 20 मजदूरों की जान जा चुकी है। हालात ऐसे हैं कि हर गुजरते घंटे के साथ स्थिति और गंभीर होती नजर आ रही है, क्योंकि कई घायल अब भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्लांट के बॉयलर/ट्यूब में अचानक हुए विस्फोट ने काम कर रहे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि कई मजदूर मौके पर ही मौत के आगोश में समा गए, जबकि कई गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे के तुरंत बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार के बीच राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

घायलों को आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के मुताबिक कई मजदूरों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। चिकित्सकीय सूत्रों का कहना है कि गंभीर रूप से झुलसे घायलों के चलते मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है, जिससे स्थिति और चिंताजनक बनी हुई है।

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हादसे के बाद प्रशासन ने राहत कार्य तेज करते हुए मृतकों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 7 शवों का पोस्टमार्टम किया गया, जबकि जिला अस्पताल में 5 शवों का परीक्षण पूरा हुआ। अन्य शवों का पोस्टमार्टम कर उन्हें परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। अस्पतालों के बाहर परिजनों की भीड़ और उनका दर्द इस त्रासदी की भयावहता को बयां कर रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट के बाद प्लांट के अंदर मलबा, धुआं और जली हुई संरचनाएं इस बात की गवाही दे रही हैं कि हादसा कितना भयानक था। राहत टीमों को मलबे के बीच फंसे मजदूरों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती स्तर पर सुरक्षा मानकों में भारी लापरवाही और तकनीकी खामियों की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

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इस हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी उजाड़ दी है। मृतकों में बड़ी संख्या ऐसे मजदूरों की है, जो दूसरे राज्यों से रोजी-रोटी कमाने यहां आए थे। एक झटके में परिवारों का सहारा छिन गया, जिससे गांव-गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजन जहां एक ओर अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दूसरी ओर वे न्याय और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं।

सहायता राशि की घोषणा

मुख्यमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि की घोषणा की गई है। इसी प्रकार, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों हेतु 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता स्वीकृत की गई है।

कंपनी प्रबंधन ने कहा है कि वे प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। दिवंगत श्रमिकों के परिजनों को 35 लाख रुपये की आर्थिक सहायता एवं रोजगार सहयोग, तथा घायलों को 15 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। घायलों को पूर्ण स्वस्थ होने तक वेतन जारी रहेगा और परामर्श (काउंसलिंग) की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

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मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री (5 लाख), प्रधानमंत्री ( 2 लाख ) और कंपनी प्रबंधन द्वारा (35 लाख) कुल मिलाकर प्रत्येक पीड़ित परिवार को 42 लाख रूपये दिए जायेंगे।

मृतकों के नाम

हादसे में मृतकों में छत्तीसगढ़ के 5, बिहार के 2, झारखंड के 3, पश्चिम बंगाल के 5 तथा उत्तर प्रदेश के 2 मजदूर शामिल हैं। मृतकों के नाम इस प्रकार हैं–

रितेश कुमार (सोनबर्शा, भागलपुर, बिहार),

अमृत लाल पटेल (मंझापारा, डभरा, सक्ती, छत्तीसगढ़),

थंडा राम लहरे (मालखरौदा, सक्ती, छत्तीसगढ़),

तरुण कुमार ओझा (सिंदरी, धनबाद, झारखंड),

आकिब खान (दरभंगा, बिहार),

सुसांत जना (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),

अब्दुल करीम (झारखंड),

उधव सिंह यादव (रायगढ़, छत्तीसगढ़),

शेख सैफुद्दीन (हल्दिया, पश्चिम बंगाल),

पप्पू कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),

अशोक परहिया (पलामू, झारखंड),

मनस गिरी (पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल),

बृजेश कुमार (सोनभद्र, उत्तर प्रदेश),

रामेश्वर महिलांगे (जांजगीर–चांपा, छत्तीसगढ़),

कार्तिक महतो (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल),

नदीम अंसारी (सक्ती, छत्तीसगढ़),

शिबनाथ मुर्मू (पुरुलिया, पश्चिम बंगाल)।

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