
बिलासपुर। कड़ाके की ठंड हो या तपती धूप, अक्सर हमारे शहर की सड़कों पर कई ऐसे चेहरे नजर आते हैं जिनकी आँखों में बेबसी और हाथों में खालीपन होता है। उम्र के ढलते पड़ाव पर अपनों से ठुकराए गए बुजुर्ग और समाज की मुख्यधारा से कटे हुए लोग अक्सर सड़कों को ही अपना आशियाना बना लेते हैं। लेकिन अब, प्रशासन ने इनकी सुध ली है। नगर निगम और समाज कल्याण विभाग ने मिलकर इन ‘सड़क के वारिसों’ को सम्मानजनक जीवन देने के लिए एक ठोस योजना तैयार की है, ताकि कोई भी बेसहारा खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो।
शहर की गलियों और चौराहों पर अक्सर हमें ऐसे बुजुर्ग और थर्ड जेंडर के लोग मिल जाते हैं, जो जीवन की मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। समाज की उपेक्षा और अपनों के अभाव में इन लोगों का जीवन अंधकारमय हो जाता है। इनकी बेबसी को देखते हुए प्रशासन ने अब एक संवेदनशील कदम उठाया है। विभाग का मानना है कि केवल भोजन देना ही काफी नहीं, बल्कि इन्हें एक ऐसा सुरक्षित स्थान देना जरूरी है जहाँ ये आत्मसम्मान के साथ अपना शेष जीवन गुजार सकें
प्रशासन द्वारा अब ‘भिक्षुक गृह’ और ‘वृद्धाश्रम’ जैसी सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ किया गया है। यहाँ रहने वालों के लिए न केवल रहने की जगह, बल्कि निःशुल्क भोजन, चिकित्सा और स्वास्थ्य जांच की भी समुचित व्यवस्था की गई हैँ समाज कल्याण विभाग ने स्पष्ट कहा हैँ की कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति सीधे उनके कार्यालय या जोनल ऑफिस में संपर्क कर सकता है। प्रशासन की इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य इन लोगों का पुनर्वास करना और उन्हें समाज में फिर से एक पहचान दिलाना है।




