कांकेर में मलेरिया से गई एक और जान, तीन माह के जुड़वा बच्चों की मां ने तोड़ा दम, अब तक हुई 4 की मौत; इलाके में दहशत

कांकेर। जिले में मलेरिया से अब चार मौत हो गई है। भानुप्रतापपुर विकासखंड में मलेरिया से ग्राम चिचगांव निवासी एक 25 वर्षीय महिला की मलेरिया से मौत का मामला सामने आया है।
आश्रम-छात्रावासों के दो बच्चों की असमय मौत हो चुकी है। मृतका महिला अपने पीछे एक पांच साल की बच्ची और महज तीन माह के दो मासूम जुड़वा बच्चों को छोड़ गई है। इस घटना के बाद से ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं और मलेरिया नियंत्रण अभियानों पर सवाल उठा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका राकेश्वरी कोला (25 वर्ष), पति छबी लाल कोला, निवासी ग्राम चिचगांव, कुछ दिन पूर्व अपने मायके अड़जाल (मानपुर क्षेत्र) गई हुई थी। परिजनों ने बताया कि मायके प्रवास के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। सोमवार को जब गांव की मितानिन ने घर पहुंचकर मलेरिया जांच की, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद सोमवार रात अचानक महिला की हालत अत्यधिक बिगड़ गई और इलाज के अभाव या समयानुसार सही उपचार न मिल पाने के कारण मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
इस दुखद घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। मृतका की एक 5 वर्ष की बेटी है, जबकि मात्र 3 माह पहले ही उसने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। मां की मौत के बाद इन नवजात जुड़वा बच्चों और मासूम बच्ची की देखभाल को लेकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
भानुप्रतापपुर और समीपस्थ इलाकों में लगातार बढ़ते मलेरिया के मामले अब गंभीर रूप ले चुके हैं। इससे पहले आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले दो मासूम बच्चों की जान भी मलेरिया के कारण जा चुकी है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर रोकथाम और त्वरित उपचार के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों में बढ़ते प्रकोप को लेकर भारी चिंता और आक्रोश है।
भानुप्रतापपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मलेरिया के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हॉस्टलों और आश्रमों में बच्चों की मौत के बाद अब ग्रामीण अंचलों में भी मौतों का सिलसिला शुरू होने से ग्रामीणों में भारी दहशत है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर रोकथाम और प्रभावी छिड़काव न किए जाने के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है।



