जांजगीर चांपा

जांजगीर: …..जिल्लत भरी राहों से गुजरकर यहां करना होता है अंतिम संस्कार…देखें वीडियो…

जांजगीर-चांपा
जिले के अकलतरा जनपद पंचायत अंतर्गत दूसरे बड़े गांव पोड़ी दल्हा मे सतनामी समाज के लिए श्मशान जाने के लिए रास्ता नही होने के कारण शवयात्रा मे शामिल लोगों और शव को चार कंधो पर उठाये लोगो को किस तरह खेतो से पार करना पड़ा, यह वे ही बता पायेंगे जिनके घर में यह दुखद घटना हुई है। इस समाज के लिए श्मशान घाट जाने के लिए कोई रास्ता नही है जिसके चलते 12 से 15 खेतों को पार कर श्मशान घाट पहुंचने की मजबूरी है और ऐसे बरसात के मौसम में खेतो की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि पोडी दल्हा के सतनामी मोहल्ले में पवन आदिले की मां श्रीमती राजबाई का आज दोपहर निधन हो गया है। जब स्व. राजबाई के शव को श्मशान ले जाने की बारी आयी तो शवयात्रा मे शामिल होने आये लोगो को भरे खेत से होकर गुजरना पड़ा। गांव के किसान होने से खेतो से गुजरना ग्रामीणो के लिए कष्टप्रद नही होता पर जिस बेटे की मां और पति की जीवन संगिनी चली गयी हो उसके लिए इन पानी से भरे खेतो से गुजरना कितना कठिन होता होगा यह आम शहरी लोग भी अंदाजा लगा सकते है और उन परिजनो का जिन्होने शव को कंधे पर ढोकर पानी से भरे खेतो से गुजरना और शव को संभाले रखना कितना कठिन होता है, इस पीड़ा को वही समझ सकता है जो इस दुख से गुजरता है।

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दलदल व पानी भरे 12 से 15 खेतों को पार कर अंतिम संस्कार करने की मजबूरी

ग्राम पंचायत से जिला पंचायत तक लगा चुके हैं फरियाद
इस मामले मे सतनामी समाज द्वारा गांव के सरपंच से फरियाद की गयी थी लेकिन भ्रष्टाचार मे आकंठ डूबे सरपंच पर मानवीय भावनाओ का क्या प्रभाव पडेगा। यह भी विदित हो कि जिला पंचायत द्वारा तत्कानीन जिला पंचायत सीईओ गजेन्द्र ठाकुर ने सतनामी समाज के लिए अहाता और श्मशान भूमि मे मुक्ति धाम के लिए प्रस्ताव पास कर दिया था बताया यह भी जा रहा है कि तत्कालीन जनपद सीईओ सत्यव्रत तिवारी ने व्यक्तिगत चिढ़ की भावना से इस प्रस्ताव पर विचार नही किया था और इस प्रस्ताव को रद्दी की टोकरी मे डाल दिया था।

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