छत्तीसगढ़

आज मजदूर दिवस : दस्तावेजों की दीवार… चार माह में 24 हजार ‘श्रमवीर’ नहीं बन पाए श्रमिक, लौट गए बैरंग

रायपुर। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग बड़े और छोटे शहरों में दूसरे राज्यों और राज्य के ही अन्य जिलों के निर्माण श्रमिक रोजी रोटी की तलाश में जाते हैं, प्रवासी मजदूर कहे जाने वाले इन लोगों को शासन की योजनाओं, सुविधाओं का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराना होता है। श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इसी साल जनवरी से लेकर अप्रैल तक करीब 83 हजार श्रमिकों ने पंजीयन के लिए आवेदन किए, लेकिन इनमें से लगभग 24 हजार के आवेदन वापस कर दिए गए। 

खास बात ये है कि,  इन सभी के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए क्योंकि ये लोग पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं दे पाए। यही दस्तावेज की दीवार प्रवासी मजदूरों को मजबूर बना रही है, ये सारे लोग पंजीयन के लिए तरस गए हैं। छत्तीसगढ़ में दूसरे राज्यों से मजदूरी के लिए आने वाले श्रमिकों को प्रवासी श्रमिक के रूप में पंजीकृत किया जाता है, यही नहीं राज्य के एक जिले से दूसरे जिले में जाकर काम करने वाले इंटर डिस्ट्रक्ट माइग्रेट लेबर माने जाते हैं। राज्य में पिछले चार महीनों में प्रवासी श्रमिक निर्माण पंजीयन रिपोर्ट के मुताबिक 82 हजार 865 के आवेदन आए। इनमें से 58 हजार 601 के आवेदन स्वीकृत कर उनका पंजीयन किया गया। लेकिन जिन मजदूरों के पास पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेज नहीं थे, उनके आवेदन वापस कर दिए गए, इनकी संख्या 24 हजार 264 है।

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बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ में कम रुझान
आंकड़ों से साफ होता है कि जहां मैदानी इलाकों रायपुर, बिलासपुर, मुंगेली में प्रवासियों की संख्या हजारों में है, वहीं बस्तर संभाग के जिलों जैसे कोंडागांव (1), सुकमा (3) और बीजापुर (7) में यह संख्या दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई है। यह दर्शाता है कि राज्य के भीतर भी विकास और रोजगार के अवसरों का वितरण काफी असमान है।

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दस्तावेज की ‘दीवार’ और मजदूरों की मजबूरी
छत्तीसगढ़ में ‘भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल’ के तहत पंजीकरण के लिए कुछ अनिवार्य दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। जानकारों के मुताबिक, आवेदन निरस्त होने के पीछे मुख्य रूप से इन तीन कागजों की कमी होती है। इसमें नियोजन प्रमाण पत्र सबसे बड़ी बाधा यह साबित होती है कि मजदूर जिस ठेकेदार या बिल्डर के पास काम कर रहा है, वह उसे लिखित में प्रमाण पत्र नहीं देता। सरकारी नियमों के अनुसार, श्रमिक को पिछले एक साल में कम से कम 90 दिन निर्माण कार्य करने का प्रमाण देना अनिवार्य है। ये दस्तावेज दे पाना प्रवासी श्रमिकों के लिए चुनौती बन गया है।

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बिलासपुर, मुंगेली प्रवासी श्रमिकों का ठिकाना
आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सबसे अधिक 11,682 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 10,099 का पंजीकरण सफल रहा। हालांकि, पड़ोसी जिले मुंगेली की स्थिति अधिक चिंताजनक है। यहाँ 11,639 आवेदन मिले, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 4,609 आवेदन (लगभग 40%) दस्तावेजों के अभाव में वापस कर दिए गए।

प्रमुख जिलों की स्थिति ऐसी
बिलासपुर- 11,682 प्राप्त (1,583 निरस्त) मुंगेली- 11,639 प्राप्त (4,609 निरस्त) कवर्धा- 7,831 प्राप्त (3,294 निरस्त) बेमेतरा – 4,170 प्राप्त (2,783 निरस्त।

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