रायपुर मेंं डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट कर दुकानदार से वसूले 8.50 लाख, जेवर बेचकर रकम ट्रांसफर की

रायपुर। खमतराई थाना क्षेत्र के बजरंग नगर उरकुरा निवासी 64 वर्षीय किराना दुकानदार को साइबर ठगों ने करीब डेढ़ महीने तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर अपने जाल में फंसाए रखा। ठगों ने पहले महिला बनकर फोन किया और बताया कि उसके नाम से आईसीआईसीआई बैंक खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपये की मनी लांड्रिंग हुई है।
इसके बाद अलग-अलग लोगों ने सीबीआई अधिकारी और आईपीएस अधिकारी बनकर उसे डराया-धमकाया। परिवार को गिरफ्तार कराने की धमकी दी और लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा। घबराए दुकानदार ने अपनी जमा पूंजी और सोने के जेवर बेचकर जुटाए 8.50 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
देवसिंह साहू ने खमतराई पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 18 अगस्त की सुबह करीब नौ बजे उसके मोबाइल पर एक महिला का फोन आया। महिला ने कहा कि उसके नाम से आईसीआईसीआई बैंक खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपये की मनी लांड्रिंग हुई है। इसके बाद उसने आदित्य नाम के व्यक्ति से बात कराई। आदित्य ने देवसिंह से उसके परिवार, जमीन और बैंक खातों से जुड़ी निजी जानकारी हासिल की।
इसके बाद उसे एक अन्य नंबर से फोन और वाट्सएप कॉल आया। फोन करने वाले ने अपना नाम बलराज सिंह बताते हुए खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। उसने भी देवसिंह और उसके परिवार की जानकारी ली। इसके बाद वीडियो कॉल पर प्रदीप सिंह नाम के व्यक्ति से बात कराई गई। उसने खुद को आईपीएस अधिकारी बताया और देवसिंह को उसके बैंक खाते में करोड़ों रुपये की मनी लांड्रिंग होने की बात कहकर जेल भेजने की धमकी दी।
साइबर ठगों ने देवसिंह को इस कदर भयभीत कर दिया कि वह उनकी हर बात मानने लगा। 18 अगस्त से तीन सितंबर तक आरोपितों ने वीडियो कॉल के जरिए उसे लगातार डराए रखा। इसके बाद चार सितंबर से रकम ट्रांसफर करने का सिलसिला शुरू हुआ। देवसिंह ने आरोपितों के बताए अलग-अलग बैंक खातों में कई बार एक-एक लाख रुपये भेजे। एक ट्रांजेक्शन 50 हजार रुपये का भी किया गया। इस तरह 4 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच उसने कुल 8.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि ठगों के दबाव में उसने अपने बैंक खाते में जमा रकम के साथ सोने के जेवर भी बेच दिए। जीवनभर की जमा पूंजी गंवाने के बाद भी आरोपित लगातार और पैसे की मांग कर रहे थे। लगातार धमकियों के कारण वह इतने डर गए थे कि उन्होंने इस घटना की जानकारी अपने बेटे-पुत्री तक को नहीं दी।
जब ठगों की पैसों की मांग लगातार बढ़ती गई तो देवसिंह ने 3 अक्टूबर को हिम्मत कर अपने छोटे भाई सुंदर लाल साहू को पूरी घटना बताई। भाई ने बातचीत सुनने और घटनाक्रम जानने के बाद उन्हें समझाया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद देवसिंह ने बैंक स्टेटमेंट, ठगों के साथ हुई चैट और मैसेज के स्क्रीनशॉट तथा ट्रांजेक्शन की रसीदें जुटाईं और 4 अक्टूबर को खमतराई थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में ठगी में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल नंबरों के धारकों को संदिग्ध आरोपी के रूप में दर्ज किया गया है। पुलिस बैंक खातों में भेजी गई रकम और ट्रांजेक्शन की कड़ियों के आधार पर ठगों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।




