छत्तीसगढ़

रामलला के ननिहाल से पहुंचा विशेष चावल, जवाफूल की खुशबू से महकेगा मंदिर परिसर; खीर का लगेगा भोग

इंदौर

अयोध्या में भव्य राम मंदिर में रामलला के दरबार में उनके स्थापना के जश्न का आगाज हो चुका है। 22 जनवरी को मुहूर्त के मुताबिक, रामलला की मूर्ति की स्थापना की जाएगी। 16 जनवरी से उसके लिए पूजा-प्रार्थना शुरू हो चुकी है। 22 जनवरी की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूरे देश में भव्य तैयारियां की गई हैं और हर किसी ने उसके लिए पूरी तैयारी भी कर ली है। इसी बीच, जानकारी मिली है कि रामलला को उनके ननिहाल छत्तीसगढ़ से भेजे गए जवाफूल चावल से तैयार खीर का भोग लगाया जाएगा। साथ ही, इसी चावल से बने भात का भोग भी लगेगा।

See also  जांजगीर-चांपा : बड़ा खुलासा! किरायेदार सत्यापन में पकड़ा गया ISI स्लीपर सेल का संदिग्ध

छत्तीसगढ़ से भेजे गए हैं 3000 टन चावल
प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ से करीब 3000 क्विंटल चावल अयोध्या भेजे गए हैं। इसी तीन हजार टन चावल से ही राम मंदिर में होने वाले भंडारे की शुरुआत की जाएगी। इसी चावल का प्रसाद प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व संत महात्मा समेत स्थापना पर मौजूद रहे तमाम लोग ग्रहण करेंगे। अब तक 11 ट्रक चावल अयोध्या पहुंच चुके हैं।

See also  200 टन मलबे की प्रोसेसिंग से निकले 5 बेशकीमती हीरे, CM साय ने कहा- प्रदेश के विकास को मिलेगा नया आयाम

11 ट्रक पहुंचे अयोध्या
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स एसोशिएशन ने राम मंदिर परिसर से 3000 टन चावल अयोध्या भेजा था। चांवल से भरे 11 ट्रकों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 30 दिसंबर को हरी झंडी दिखाकर श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या के लिए रवाना किया था। इस अवसर पर मंत्री बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर सांसद सुनील सोनी, मंत्री दयाल दास बघेल और मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी मौजूद थे। इसको लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णु देव साय ने एक पोस्ट भी शेयर किया था। इस पोस्ट में उनके साथ और कई लोग नजर आए। उन्होंने लिखा था कि भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा में तन-मन और धन समर्पित करने का भाव संजोए छत्तीसगढ़।

See also  कार्यक्रम से लौट रहे यात्रियों से भरा वाहन पलटा, 35 लोग घायल, कई लोगों को गंभीर चोटें आई

बेहद सुगंधित और स्वादिष्ट बनती है खीर
दरअसल, छत्तीसगढ़ का जवाफूल चावल अपनी महक के लिए मशहूर है। इस किस्म के चावल की मांग केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी होती है। चावल की यह पारंपरिक किस्म आदिवासी किसानों द्वारा जंगल में साफ स्थानों पर उगाई जाती है। जवाफूल के अलावा भी छत्तीसगढ़ में सुगंधित चावल की कई किस्में हैं, जैसे जीराफूल, दुबराज, बादशाह, तरुण भोग आदि, लेकिन जवाफूल चावल सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।

Related Articles

Leave a Reply