छत्तीसगढ़

मंत्रिमंडल विस्तार टला!: केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा नाम, स्थानीय नेताओं में नहीं बन पाई सहमति

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चा चल रही है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दो दिन पहले इस पर कहा था कि कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. लेकिन अब नई अपडेट सामने आई है कि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही इसके होने के आसार हैं. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही इस मसले पर प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय ले सकता है.

पार्टी और सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो भले ही कैबिनेट विस्तार का राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है, लेकिन इससे जुड़ी कुछ अहम सिफारिशों और समन्वय को लेकर केंद्रीय नेतृत्व बैठक करना चाहता है. यही वजह है कि यह विस्तार फिलहाल कुछ दिनों के लिए टल गया है.

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बताया जा रहा है कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव इसी माह होने वाला है और इसके बाद ही छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. इसी क्रम में हाल ही में प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन और राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ दो दिन तक गहन मंत्रणा की थी. इस बैठक में संगठन महामंत्री अजय जामवाल और पवन साय भी मौजूद थे. बैठक के बाद जल्द विस्तार की अटकलें तेज हो गई थीं.

सीएम विष्णुदेव साय पहले ही साफ कर चुके हैं कि मंत्रिमंडल में फेरबदल जल्द किया जाएगा. बता दें कि सरकार में मुख्यमंत्री समेत 11 मंत्री हैं. बृजमोहन अग्रवाल के सांसद बनने के बाद से एक पद रिक्त हुआ था. इस लिहाज से 2 मंत्री पद रिक्त माने जाते रहे हैं, लेकिन हरियाणा फार्मूला लागू होने के बाद एक अतिरिक्त मंत्री पद राज्य में बढ़ जाएगा. इस लिहाज से मंत्रिमंडल की कुल संख्या 14 की हो जाएगी.

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भाजपा के सोशल मीडिया ग्रुपों में चल रहे मैसेज के अनुसार भी यह जानकारी वायरल हो रही है कि तीन नए मंत्री शपथ लेंगे. वायरल मैसेज में शपथ लेने वाले मंत्रियों के नाम अमर अग्रवाल, पुरंदर मिश्रा और गजेंद्र यादव हैं. गजेंद्र यादव संघ बैकग्राउंड के साथ-साथ यादव समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं. राज्य में ओबीसी वर्ग में साहू समाज के बाद सर्वाधिक संख्या यादवों की हैं. ऐसे में उनका मंत्री बनाया जाना लगभग तय है. 14 साल तक मंत्री रह चुके अमर अग्रवाल रिजल्ट ओरिएंटेड काम करने के लिए पहचाने जाते हैं. भीड़ से अलग रहकर काम करने में भरोसा करने वाले अमर अग्रवाल ने पूर्ववर्ती रमन सरकार में आबकारी पॉलिसी बनाई थी. शराब बिक्री का ठेका सिस्टम खत्म किया था. इस फैसले से आबकारी राजस्व में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई थी. अमर अग्रवाल देश में इकलौते चेहरे रहे हैं, जो सर्वाधिक लंबे समय तक जीएसटी काउंसिल में बतौर सदस्य शामिल थे. उनका मंत्री बनना लगभग तय है. तीसरे नाम को लेकर सबसे ज्यादा असमंजस का दौर है. सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज में पुरंदर मिश्रा को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, लेकिन इस दौड़ में रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत और कुरुद विधायक अजय चंद्राकर भी रेस का हिस्सा रहे हैं. लेकिन तीसरे मंत्री के नाम को लेकर संगठन के भीतर काफी खींचतानी जारी है.

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