छत्तीसगढ़

आयुष्मान के 600 करोड़ बकाया: निजी अस्पतालों ने चेताया- 10 दिन में भुगतान नहीं किया तो इलाज बंद

रायपुर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य एवं शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना में निजी अस्पतालों का पांच महीने का लगभग 600 करोड़ का भुगतान अटक गया है। निजी अस्पतालों के डॉक्टर इस मामले को लेकर लामबंद हो गए हैं और 10 दिन में भुगतान नहीं होने पर इलाज बंद करने जैसा कदम उठाने की बात कह रहे हैं। छोटे अस्पतालों से बायोमेडिकल वेस्ट के नाम पर वसूले जाने वाले बड़े यूजर चार्ज पर भी नाराजगी जाहिर की गई है।

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निजी अस्पताल के संचालन में राज्य में आने वाली कठिनाईयों पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और एएचपीआई की शनिवार और रविवार को दो अलग-अलग बैठकें हुईं, जिसमें इन तीन बड़ी समस्याओं को लेकर चर्चा गरम रही। निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि आयुष्मान योजना के भुगतान प्रक्रिया का अब तक सरलीकरण नहीं हुआ है। इस बार पिछले पांच महीने से अस्पतालों को भुगतान नहीं किया गया है और लंबित राशि 600 करोड़ तक पहुंच गई है। राशि नहीं मिलने की वजह से छोटे और मंझोले अस्पतालों के संचालन में काफी कठिनाई हो रही है।

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प्रदेश में विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए निजी हास्पिटल्स को वर्ष 2018 में निर्धारित दर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। इसमें संशोधन की बातें कई बार की जा चुकी हैं, मगर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। अस्पताल संचालन के लिए आवश्यक सभी चिकित्सकीय उपकरणों, दवाईयों एवं अन्य सामग्री की कीमतों तथा नर्सिंग एवं पैरामेडिकल जैसे मानव संसाधनों के वेतन आदि में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। पदाधिकारियों के मुताबिक, महंगाई और वेतन सहित अन्य खर्चों में हुई वृद्धि के मद्देनजर आयुष्मान योजना की वर्तमान दरों पर उपचार संभव नहीं हो पा रहा है अतएव योजना के दरों में पुनर्निधारण की आवश्यकता है।

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