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सिविल सर्जन का एक और कारनामा: युवकों ने कहा – नियुक्ति आदेश के बावजूद नहीं करने दे रहे ज्वॉइन, गाली-गलौज और धमकी देने का लगाया आरोप

जांजगीर-चांपा। जिला अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल के खिलाफ विवाद बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से दुर्व्यवहार के बाद अब उन पर घूसखोरी के भी गंभीर आरोप लगे हैं। गुरुवार दोपहर दो युवकों ने सिविल सर्जन और अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार पर नियुक्ति के बदले रिश्वत मांगने और बदसलूकी करने का आरोप लगाया है।

नियुक्ति आदेश मिलने के बाद भी भटक रहे युवा

बता दें कि शिकायतकर्ता युवकों का नाम देवेंद्र कुमार राठौर राहुल कुमार है। दोनों युवकों का कहना है कि 22 नवंबर 2024 को तत्कालीन सीएमओ ने उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्ति पत्र जारी किया था, लेकिन सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार इस नियुक्ति को मानने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों अधिकारियों ने उनसे नौकरी के बदले पैसे की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की तरह उनसे गली-गलौच और हॉस्पिटल में दोबारा दिखाई न देने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

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डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की नाराजगी बरकरार

गौरतलब है कि इससे पहले, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने सिविल सर्जन पर तानाशाही रवैया अपनाने, मानसिक प्रताड़ना और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। कर्मचारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर शुक्रवार सुबह तक सिविल सर्जन को नहीं हटाया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।

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जांच टीम कर रही बयान दर्ज

जिला प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने गुरुवार को अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के बयान दर्ज किए। अब घूसखोरी के नए आरोपों के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो सिविल सर्जन डॉ. दीपक जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक अंकित ताम्रकार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है। वहीं, अगर आरोप निराधार निकलते हैं, तो प्रदर्शनकारी कर्मचारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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