छत्तीसगढ़

तैरकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे : पुल के लिए तीन साल पहले 6 करोड़ मंजूर, अब तक शुरू नहीं हुआ काम

मैनपुर। गरियाबंद जिले के ग्राम जरंडी के ग्रामीण आज भी ऐसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं, जहां रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। गांव और जंगल धवलपुर के बीच बहने वाली बड़ी नदी पर पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने बरसात के दिनों में सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। नदी में पानी बढ़ने और तेज बहाव के बावजूद ग्रामीण जान हथेली पर रखकर नदी पार करने को मजबूर हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति तब बनती है, जब स्कूली बच्चों को भी शिक्षा के लिए इसी नदी को पार करना पड़ता है। तेज बहाव के बीच बच्चों को नदी पार कर स्कूल जाने का जोखिम उठाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और कई बार अभिभावकों को भी बच्चों के साथ नदी पार करनी पड़ती है। 

तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 17 किमी दूर गरियाबंद विकासखण्ड के अंतिम छोर में बसा ग्राम जरण्डी, बोड़ापाला के दर्जनभर स्कूल से पढ़कर निकलने वाले छात्र-छात्राएं बाकड़ी नदी को तैरकर या फिर ट्यूब के सहारे पारकर धवलपुर हाईस्कूल पहुंचते हैं। ज्ञात हो कि यह बाकड़ी नदी आगे चलकर सिकासार जलाशय में मिलती है। यहां बारिश के पूरे चार माह कमर तक पानी चलते रहता है। कुछ वर्ष पहले इस बाकड़ी नदी को ग्राम जरण्डी बोड़ापाला की एक छात्रा की बह जाने से मौत हो गई थी।

जरंडी गांव के लोगों के लिए जंगल धवलपुर केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जरूरतों का प्रमुख केंद्र है।

बाकड़ी नदी में उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए 2023 में कांग्रेस सरकार के दौरान 6 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। सर्वे का कार्य हो चुका है लेकिन इससे आगे कुछ नहीं हो रहा है। सरपंच दिनेश कुमार नेताम, उपसरपंच बालकिशन ध्रुव, गजपति ने बताया कई बार पुल निर्माण की मांग कर चुके हैं अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया। अब इस मामले को लेकर क्षेत्र का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात करेगा।

बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि यहां के नदी में अभी कमर से ऊपर पानी चल रहा है। स्कूली बच्चे जान जोखिम मे डालकर पढ़ाई करने आ रहे हैं। बच्चो की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन को चाहिए कि मोटरबोट की व्यवस्था की जाए और सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएं। साथ ही पुल निर्माण किया जाए। अन्यथा आंदोलन किया जाएगा।

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