5 साल में 10 गुना बढ़े पर्यटक : 30 लाख से बढ़कर 3.14 करोड़ तक पहुंचे सैलानी, बस्तर बना पहली पसंद

रायपुर। एक वक्त था जब छत्तीसगढ़ का नाम आते ही लोगों के जेहन में घने जंगल, नक्सलवाद और हिंसा की तस्वीर उभरती थी। राज्य के कई खूबसूरत इलाकों में जाने से लोग डरते थे। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। जिन जंगलों और पहाड़ों को कभी सुरक्षा के सवाल से जोड़कर देखा जाता था, आज वही प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही है।
बस्तर के झरने हो, जंगल हो या छत्तीसगढ़ के दूसरे पर्यटन स्थल, अब देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां पहुंच रहे हैं। साल 2020 में जहां राज्य में करीब 30.13 लाख पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2021 में यह संख्या बढ़कर 1.15 करोड़ हो गई। 2022 में करीब 2.36 करोड़, 2023 में 2.60 करोड़ और 2024 में लगभग 3.14 करोड़ पर्यटक छत्तीसगढ़ पहुंचे। कुछ ही वर्षों में पर्यटन का आंकड़ा कई गुना बढ़ गया।
छत्तीसगढ़ में बढ़ते पर्यटन की तस्वीर दूसरे राज्यों के आंकड़ों से तुलना करने पर और स्पष्ट होती है। हिमाचल प्रदेश में 2020 में करीब 22 लाख, 2021 में 56 लाख, 2022 में 1.51 करोड़ और 2023 में 1.60 करोड़ पर्यटक पहुंचे थे। वहीं जम्मू-कश्मीर में 2020 में करीब 53 लाख, 2021 में 56 लाख, 2022 में 1.92 करोड़ और 2023 में 225 करोड़ पर्यटकों की आवाजाही दर्ज की गई। दूसरी ओर, गोवा में 2023 में करीब 86 लाख पर्यटक पहुंचे थे। इन राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या में बीते कुछ वर्षों में जिस तेजी से इजाफा हुआ है, वह राज्य के बदलते पर्यटन परिदृश्य को दिखाता है। 2024 में छत्तीसगढ़ में करीब 314 करोड़ पर्यटकों का पहुंचना इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करता है।
मानसून छत्तीसगढ़ के पर्यटन के लिए खास मौसम माना जाता है। बारिश के बाद राज्य के जंगलों, पहाड़ों और झरनों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस बार मानसून में पर्यटकों की संख्या को लेकर उम्मीदें काफी बड़ी हैं। बताया जा रहा है कि हर महीने करीब 20 लाख तक पर्यटक राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों तक पहुंच रहे हैं। अगर यह रफ्तार बनी रही तो इस मानसून में पर्यटन का नया रिकॉर्ड बन सकता है। देश के दूसरे हिस्सों से भी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ रही है।
पर्यटन विभाग एमडी सौमिल रंजन चौबे ने बताया कि, छत्तीसगढ़ के जिन इलाकों को लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण देश के पर्यटन नक्शे से दूर माना जाता था, अब उन्हीं इलाकों की प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को आकर्षित कर रही है। बस्तर की वादियां, झरने, जंगल, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक पर्यटन स्थल सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा फायदा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा है है। होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, टैक्सी, स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े लोगों के लिए रोजगार और कमाई के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।




