छत्तीसगढ़

रायपुर में गणेशजी के मूल स्वरूप से छेड़छाड़, प्रतिमा को सिक्स पैक्स में दिखाया, हिंदू संगठनों ने जताया विरोध

रायपुर। गणेशोत्सव की तैयारियों के साथ राजधानी के माना कैंप सहित विभिन्न मूर्तिकला केंद्रों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं आकार लेने लगी हैं। पिछले वर्ष एआइ से तैयार गणेश प्रतिमाओं को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद प्रशासन ने प्रतिमा निर्माण को लेकर गाइडलाइन भी जारी की थी। इसके बावजूद कुछ मूर्तिकार गणेशजी के पारंपरिक स्वरूप से छेड़छाड़ कर प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।

ऐसी ही एक प्रतिमा में भगवान गणेश की फिटनेस दिखाते हुए सिक्स पैक्स के साथ बनाया गया है। पारंपरिक स्वरूप में गणेश जी का पेट निकला रहता है। धार्मिक भावनाओं से जुड़े गणेशजी के स्वरूप में इस तरह के बदलाव को लेकर हर वर्ष विरोध होता रहा है। इसके बावजूद ऐसी प्रतिमाएं तैयार की जा रही है। प्रशासन की तरफ से गाइडलाइन जारी कर दी जाती है, लेकिन उसका पालन हो रहा है कि नहीं इसकी निगरानी नहीं होती है।

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पिछले वर्ष एआइ आधारित गणेश प्रतिमाओं को लेकर विवाद खड़ा हुआ था और एफआइआर तक दर्ज हुई थी। इसके बाद इस वर्ष हिंदू संगठनों ने भी मूर्तिकारों से पारंपरिक स्वरूप बनाए रखने की अपील की है। धार्मिक आस्था और परंपरा का सम्मान करते हुए बप्पा की प्रतिमाओं का मूल स्वरूप ही सबसे उपयुक्त है। आने वाली पीढ़ी अपने देवी-देवताओं के मूल स्वरूप को पहचाने, इसलिए एआइ बेस्ड मूर्ति निर्माण न करें।

मूर्तिकारों के अनुसार तीन, पांच, सात और 10 फीट तक की गणेश प्रतिमाओं की मांग सबसे अधिक है। मूर्तियां का स्वरूप लगभग बनकर तैयार हो गया है। सिर्फ रंग-रोगन और सजावट का काम बाकी है। कुछ मूर्तिकार ऐसे भी है जो एआइ से बनी मूर्ति बनाने से पूरी तरह से मना कर दिए हैं।

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शुरू में ही हिंदू संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि कार्यशालाओं में पहुंचकर मूर्तिकारों से पारंपरिक स्वरूप में ही गणेश, दुर्गा प्रतिमाएं बनाने का आग्रह किया था। इसके बावजूद कुछ मूर्तिकार पापंरिक स्वरूप से छेड़छाड़ कर मूर्ति बना रहे हैं। विवाद की स्थिति से बचने के लिए प्रशासन को निगरान करनी चाहिए।

कई मूर्तिकारों का कहना है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग अन्य कलाकृतियों में किया जा सकता है, लेकिन देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में धार्मिक मर्यादा का पालन जरूरी है। यदि कोई ग्राहक एआइ आधारित अन्य पात्रों या सजावटी कलाकृतियों की मांग करता है तो उन्हें तैयार किया जा सकता है। हालांकि भगवान गणेश की प्रतिमाएं केवल पारंपरिक स्वरूप में ही बनाई जाएंगी।

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